समाचार गढ़ 8 जून 2026, नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ते असंतोष के बीच बड़े राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने सोमवार को राज्यसभा और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही टीएमसी में संभावित टूट और बगावत की अटकलें तेज हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार दिल्ली में टीएमसी के कुछ असंतुष्ट सांसदों की बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं। वहीं पार्टी नेतृत्व लगातार सांसदों और नेताओं को एकजुट रखने की कोशिश में जुटा हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक टीएमसी संसदीय दल में असंतोष को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व सक्रिय हो गया है और संभावित टूट को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इधर, इस्तीफे के बाद सुखेंदु शेखर रॉय से टीएमसी के पांच सांसदों ने मुलाकात की। इस मुलाकात ने पार्टी के भीतर चल रही हलचल को और बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे टीएमसी के लिए एक बड़े चेतावनी संकेत के रूप में देख रहे हैं।
सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने इस्तीफे में पार्टी की कार्यप्रणाली और हालिया राजनीतिक परिस्थितियों पर नाराजगी जताई है। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है जब टीएमसी पहले से ही आंतरिक खींचतान और संगठनात्मक संकट का सामना कर रही है।
राजनीतिक घटनाक्रम के बीच टीएमसी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सांसदों और नेताओं को एकजुट बनाए रखने की है। हालांकि 14 सांसदों की कथित बैठक और संभावित बगावत को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन घटनाओं की तेजी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को गर्मा दिया है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में टीएमसी के कई नेताओं द्वारा पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए गए हैं और संगठन के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा ममता बनर्जी के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।










