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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की प्रशासन को चेतावनी, नोटिस वापस न लिया तो मानहानि का केस

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समाचार गढ़ 27 फरवरी 2026। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज मेला प्रशासन को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि यदि उन्हें जारी किया गया नोटिस वापस नहीं लिया गया तो वे मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। मंगलवार रात करीब 10 बजे उनके प्रतिनिधि ने 8 पन्नों का जवाब मेला प्रशासन कार्यालय भेजा। कार्यालय में कोई अधिकारी न मिलने पर जवाब को नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दिया गया, जिसे बाद में एसडीएम ने हटवा दिया। जवाब ई-मेल के माध्यम से भी भेजा गया है, जिसमें नोटिस को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया गया है।

मेला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला देते हुए अविमुक्तेश्वरानंद से पूछा था कि उन्होंने स्वयं को शंकराचार्य कैसे घोषित किया। इस पर स्वामी ने अपने उत्तर में कहा कि Supreme Court of India ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है, जो उन्हें शंकराचार्य पद पर बने रहने से रोकता हो। चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए किसी तीसरे पक्ष को टिप्पणी या रोक लगाने का अधिकार नहीं है।

इस विवाद पर स्वामी सदानंद महाराज (द्वारका पीठ) ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मौनी अमावस्या पर स्नान से रोके जाने की निंदा करते हुए प्रशासन से माफी मांगने की मांग की। उनका कहना था कि साधुओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया और गंगा स्नान से रोकना धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध है। गौरतलब है कि सदानंद महाराज और अविमुक्तेश्वरानंद, दोनों स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य रहे हैं।

वहीं, जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अलग रुख अपनाते हुए कहा कि प्रशासन का नोटिस उचित है। उनके अनुसार, गंगा स्नान के लिए पालकी से जाने का कोई परंपरागत नियम नहीं है और साधु-संत सामान्य रूप से पैदल ही जाते हैं। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद के साथ अन्याय नहीं हुआ, बल्कि उन्होंने स्वयं परंपरा से हटकर आचरण किया।

5 बिंदुओं में पूरा विवाद

मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान को जा रहे थे, पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा।

विरोध के दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद वे धरने पर बैठ गए।

देर रात प्रशासनिक अधिकारी नोटिस देने पहुंचे, लेकिन शिष्यों ने लेने से इनकार किया।

अगले दिन नोटिस शिविर के बाहर चस्पा कर दिया गया।

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद और वासुदेवानंद के बीच पहले से विवाद चल रहा है, जो अदालत में लंबित है।

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