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राजस्थान के सरकारी स्कूलों में आज एक साथ निरीक्षण, जर्जर भवन से लेकर शिक्षकों की संख्या तक होगी जांच

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समाचार-गढ़ 25 अगस्त, 2026।

जयपुर: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में आज प्रदेशभर में एक साथ भौतिक निरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान स्कूलों में भवन की स्थिति, क्लासरूम, पेयजल, शौचालय, पोषाहार कक्ष और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं की जांच होगी। वहीं, छात्र संख्या के मुकाबले जरूरत से अधिक शिक्षक मिलने पर उन्हें चिन्हित कर आवश्यकता वाले स्कूलों में भेजने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

निरीक्षण में सामने आने वाली गंभीर समस्याओं की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों के जरिए कलेक्टर तक पहुंचाई जाएगी, ताकि उनका समाधान कराया जा सके।

शहरी और ग्रामीण स्कूलों के लिए अलग-अलग अधिकारी जिम्मेदार

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के निर्देश के बाद बड़े और पुराने सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल आसपास के स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। शहरी क्षेत्रों में यूसीईईओ और ग्रामीण क्षेत्रों में पीईईओ निरीक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगे।

इस दौरान स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात की भी समीक्षा होगी। अगर किसी स्कूल में जरूरत से अधिक शिक्षक पाए जाते हैं, तो उन्हें चिन्हित कर जरूरत वाले स्कूलों में लगाने के प्रस्ताव 27 अगस्त सुबह 11 बजे तक सीबीईओ को भेजने होंगे।

जर्जर भवन मिला तो तुरंत देनी होगी रिपोर्ट

निरीक्षण के दौरान स्कूल के हर क्लासरूम और भवन की स्थिति देखी जाएगी। दीवारों में सीलन, प्लास्टर या पट्टियां दरकने और भवन के जर्जर होने जैसी स्थिति मिलने पर इसकी जानकारी रिपोर्ट में दर्ज करनी होगी।

इसके अलावा स्कूल में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, पोषाहार कक्ष, छत की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था भी जांची जाएगी। स्कूल परिसर या उसके आसपास जलभराव मिलने पर पानी की निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

27 अगस्त तक शाला दर्पण पर अपडेट होगा पूरा रिकॉर्ड

भौतिक सत्यापन के बाद स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी सभी जानकारी शाला दर्पण के इंफ्रास्ट्रक्चर मॉड्यूल में 27 अगस्त तक अपडेट करनी होगी।

जिन स्कूलों को जर्जर भवन के कारण दूसरे सरकारी या निजी भवनों में संचालित किया जा रहा है, वहां भी कक्षा-कक्ष, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं की उपलब्धता की जांच की जाएगी।

गंभीर समस्याओं की जानकारी कलेक्टर तक पहुंचेगी

ऐसी समस्याएं जिनका समाधान पीईईओ या यूसीईईओ स्तर पर नहीं हो सकता, उनकी सूचना सीबीईओ के माध्यम से मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी को दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी कलेक्टर को मामले से अवगत कराएंगे, ताकि समस्या का समाधान कराया जा सके।

इस निरीक्षण का उद्देश्य सिर्फ स्कूलों की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करना नहीं, बल्कि जर्जर भवन, बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षकों के असमान वितरण जैसी समस्याओं को चिन्हित कर समय पर कार्रवाई करना है।

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