समाचार-गढ़ 2 सितंबर, 2026।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबारी सत्र की शुरुआत में सेंसेक्स करीब 800 अंक तक फिसल गया, हालांकि दिन बढ़ने के साथ बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिली। इसके बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए।
30 शेयरों वाला BSE Sensex 76,471.32 के स्तर पर खुला। दिन के कारोबार में इसका हाई 76,567.55 और लो 76,135.72 रहा। अंत में सेंसेक्स 373.93 अंक गिरकर 76,570.35 पर बंद हुआ।
इसी तरह Nifty 50 23,858.00 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 23,910.65 के हाई और 23,786.80 के लो तक पहुंचा। बाजार बंद होने पर निफ्टी 141.35 अंक की गिरावट के साथ 23,914.45 पर रहा।
सेंसेक्स के 20 शेयर लाल निशान में बंद
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 20 शेयरों में गिरावट, जबकि 10 शेयरों में तेजी रही।
गिरावट वाले शेयरों में Asian Paints सबसे आगे रहा। कंपनी का शेयर 1.61% टूटकर 2,526.70 के स्तर पर बंद हुआ।
इसके अलावा HDFC में 1.56%, Mahindra & Mahindra में 1.56%, HCL Tech में 1.49%, BEL में 1.33%, Infosys में 1.28% और SBI में 1.22% की गिरावट रही।
IndiGo में 1%, TCS में 0.89%, Tech Mahindra में 0.86%, ICICI Bank में 0.61% और Maruti में 0.60% की कमजोरी देखने को मिली।
Adani Ports समेत इन शेयरों ने दिखाई मजबूती
गिरते बाजार के बीच कुछ शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। सेंसेक्स में Adani Ports सबसे ज्यादा चढ़ा और 1.63% की तेजी के साथ 1,672.90 पर बंद हुआ।
इसके अलावा Bajaj Finserv में 1.02%, Power Grid में 1%, NTPC में 0.96% और Titan में 0.70% की बढ़त रही।
Reliance Industries 0.44%, Trent 0.43%, Bajaj Finance 0.37% और ITC 0.02% की मामूली तेजी के साथ बंद हुए।
ऑटो, IT और मीडिया सेक्टर पर ज्यादा दबाव
बाजार में बिकवाली का असर कई प्रमुख सेक्टर्स पर पड़ा। सेंसेक्स के अलावा निफ्टी के 50 शेयरों में से 36 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।
ऑटो, मीडिया और Information Technology सेक्टर में खास दबाव देखने को मिला। इन सेक्टर्स में करीब 1.2% से 1.8% तक की गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिका-ईरान तनाव से क्यों घबराए निवेशक?
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल शामिल रहा।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने Strait of Hormuz को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ईरान की सेना IRGC की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि अमेरिकी हमलों के कारण इस मार्ग में और व्यवधान पैदा हो सकता है।
इस आशंका के बीच कच्चे तेल की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। तेल महंगा होने से भारत जैसे बड़े आयातक देश में महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की चिंता निवेशकों को परेशान कर रही है।
इसके साथ ही वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी बाजार sentiment पर दबाव बनाया। जापान की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 3% से ऊपर पहुंचकर करीब तीन दशक के उच्च स्तर पर चली गई है।
यानी, भूराजनीतिक तनाव + महंगा कच्चा तेल + बढ़ती बॉन्ड यील्ड—इन तीनों ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की चाल बिगाड़ दी।









