समाचार गढ़ 11 मार्च 2026 दिल्ली। देश में पहली बार किसी व्यक्ति को अदालत से इच्छा मृत्यु (यूथेनेशिया) की अनुमति मिली है। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। हरीश पिछले 12 वर्षों से अधिक समय से अचेत अवस्था में हैं और तब से बिस्तर पर ही पड़े हुए हैं।
हरीश राणा के माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उनके बेटे के ठीक होने की कोई संभावना नहीं है। वह 2013 से कोमा जैसी स्थिति में हैं और सिर्फ मशीनों व देखभाल के सहारे उनकी सांसें चल रही हैं। परिवार ने अदालत से मानवीय आधार पर इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की अपील की थी।
मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने परिस्थितियों को देखते हुए हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी।
2013 के हादसे ने बदल दी जिंदगी
दरअसल, 20 अगस्त 2013 को एक हादसे ने हरीश की जिंदगी पूरी तरह बदल दी। वह अपने पीजी की चौथी मंजिल से अचानक नीचे गिर गए थे। इस दुर्घटना में उनके सिर में गंभीर चोटें आई थीं।
इलाज के बाद उनकी जान तो बच गई, लेकिन वह कभी होश में नहीं आ सके। तब से लेकर अब तक वह अचेत अवस्था में ही बिस्तर पर पड़े हैं। लंबे समय से जारी इस स्थिति को देखते हुए उनके माता-पिता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
अब सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद यह मामला देश में इच्छा मृत्यु से जुड़े कानून और मानवीय पहलुओं पर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।










