Nature Nature

सुप्रीम कोर्ट ने SIR को बताया वैध, कहा- निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी प्रक्रिया

Nature

वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने के मामलों को 4 हफ्ते में नागरिकता एजेंसी को भेजने के निर्देश, विपक्ष ने उठाए सवाल

समाचार गढ़ 27 मई 2026 नई दिल्ली। देशभर में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने SIR प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को ऐसी विशेष प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है और इसे मनमाना नहीं कहा जा सकता।

कोर्ट ने साफ कहा कि SIR का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को कमजोर करना नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट को अधिक पारदर्शी और शुद्ध बनाकर निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। साथ ही अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि जिन लोगों के नाम संदिग्ध नागरिकता के आधार पर वोटर सूची से हटाए गए हैं, उनके मामलों को 4 सप्ताह के भीतर संबंधित सरकारी एजेंसी को भेजा जाए।

बिहार से हुई थी शुरुआत

चुनाव आयोग ने जून 2025 में सबसे पहले बिहार में SIR की प्रक्रिया शुरू की थी, क्योंकि वहां सबसे पहले विधानसभा चुनाव होने थे। इसके बाद पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी यह प्रक्रिया लागू की गई। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) कराया गया था।

इन राज्यों में करीब 2.65 करोड़ वोटर्स के नाम वोटर सूची से हटाए गए थे। बाद में देश के 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR लागू किया गया, जहां अब तक कुल 7.41 करोड़ वोटर्स के नाम सूची से हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। अब दिल्ली में भी 30 जून से SIR प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।

10 महीने चली सुनवाई

SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कई राज्यों से सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। सबसे पहले बिहार SIR का मामला अदालत पहुंचा था। अलग-अलग याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में करीब 10 महीने तक लगातार सुनवाई चली। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने पांच प्रमुख सवाल तय कर उन पर अपना फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट के पांच बड़े सवाल और उनके जवाब

1. क्या चुनाव आयोग के पास SIR करने की शक्ति है?

कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर काम कर रहा है। केवल इसलिए इस प्रक्रिया को गैरकानूनी नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह सामान्य प्रक्रिया से अलग है। अदालत ने माना कि निष्पक्ष चुनाव के लिए चुनाव आयोग को विशेष परिस्थितियों में विशेष कदम उठाने का अधिकार है।

2. क्या SIR का उद्देश्य वैध है और प्रक्रिया उचित है?

अदालत ने कहा कि SIR की प्रक्रिया संतुलित और तार्किक है। इसमें कोई मनमानी नहीं दिखाई देती। वोटर लिस्ट को सही और साफ रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है और चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कदम जरूरत से ज्यादा कठोर नहीं हैं।

3. क्या SIR जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) के खिलाफ है?

कोर्ट ने कहा कि चूंकि SIR प्रक्रिया कानूनी रूप से उचित और वैध है, इसलिए यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन नहीं करती। यही कानून चुनाव, मतदाता पात्रता और वोटर सूची से संबंधित प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है।

4. क्या चुनाव आयोग दस्तावेज मांग सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा आधार कार्ड समेत 11 प्रकार के दस्तावेज मांगे जाना गलत नहीं है। अदालत के अनुसार बिना किसी तय नियम और दिशा-निर्देश के दस्तावेजों की जांच करना उचित नहीं होगा, इसलिए दस्तावेज आधारित सत्यापन प्रक्रिया सही मानी गई।

5. जिनके नाम काटे गए उनका क्या होगा?

कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन लोगों के नाम वोटर सूची से हटाए गए हैं, उनके मामलों को 4 सप्ताह के भीतर नागरिकता तय करने वाली संबंधित सरकारी एजेंसी को भेजा जाए। संबंधित एजेंसी को नोटिस जारी कर लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा और चुनाव से पहले फैसला करना होगा।

विपक्ष ने फैसले और प्रक्रिया दोनों पर उठाए सवाल

SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर बना हुआ है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित करने की कोशिश की जा रही है।

विपक्ष का कहना है कि बिहार में वर्ष 2003 से अब तक करीब 22 वर्षों में कई चुनाव हो चुके हैं। ऐसे में यदि वोटर सूची में इतनी बड़ी गड़बड़ी थी तो क्या पूर्व के चुनाव गलत थे। विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि यदि SIR कराना जरूरी था तो इसकी घोषणा बिहार चुनाव से ठीक पहले जून 2025 में ही क्यों की गई।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि चुनाव आयोग को पुनरीक्षण करना ही था तो इसे चुनाव के बाद भी कराया जा सकता था। इतनी जल्दबाजी में प्रक्रिया लागू करने के पीछे क्या कारण थे, इसका स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

अब दिल्ली पर नजर

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब दिल्ली में शुरू होने जा रही SIR प्रक्रिया पर राजनीतिक नजरें टिक गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में अन्य राज्यों में भी वोटर सूची के व्यापक पुनरीक्षण की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

“माननीय सुप्रीम कोर्ट ने SIR के मामले पर सारे आरोपों को खारिज कर दिया है। और कहा है कि SIR की प्रक्रिया पूरी तरह सही है। चुनाव आयोग की शक्तियों के अधीन है। संविधान और कानून के नजरिए से सही है। अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 की शक्तियों के अधीन है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए यह जरूरी है।”

— अखिलेश उपाध्याय
एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट

  • Related Posts

    Delhi Airport News: बैंकॉक से आए यात्री के बैग में मिला 4.5 करोड़ का गांजा, प्रोफाइलिंग से खुला मामला

    समाचार-गढ़ 10 अक्टूबर, 2026। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 12.86 किलो से ज्यादा संदिग्ध गांजा जब्त…

    Delhi News: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर CJP का प्रदर्शन, दिल्ली में 30 हजार से ज्यादा जवान तैनात

    समाचार-गढ़ 10 अक्टूबर, 2026। दिल्ली में आज, 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    Delhi Airport News: बैंकॉक से आए यात्री के बैग में मिला 4.5 करोड़ का गांजा, प्रोफाइलिंग से खुला मामला

    Delhi Airport News: बैंकॉक से आए यात्री के बैग में मिला 4.5 करोड़ का गांजा, प्रोफाइलिंग से खुला मामला

    Delhi News: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर CJP का प्रदर्शन, दिल्ली में 30 हजार से ज्यादा जवान तैनात

    Delhi News: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर CJP का प्रदर्शन, दिल्ली में 30 हजार से ज्यादा जवान तैनात

    4000 से ज्यादा मतदाताओं वाली पंचायतों में बढ़ेगी चुनौती, रातभर जागकर मतपत्रों पर नाम लिखेंगे मतदानकर्मी

    4000 से ज्यादा मतदाताओं वाली पंचायतों में बढ़ेगी चुनौती, रातभर जागकर मतपत्रों पर नाम लिखेंगे मतदानकर्मी

    Rajasthan Panchayat Election 2026: नामांकन फॉर्म में एक गलती से रद्द हो सकता है पर्चा, सुधार का मिलेगा मौका; चरित्र प्रमाण पत्र जरूरी नहीं

    Rajasthan Panchayat Election 2026: नामांकन फॉर्म में एक गलती से रद्द हो सकता है पर्चा, सुधार का मिलेगा मौका; चरित्र प्रमाण पत्र जरूरी नहीं

    माता-पिता ने पूरी जिंदगी बच्चों पर लुटाई, अब अंतिम विदाई को भी तरस रहीं अस्थियां!

    माता-पिता ने पूरी जिंदगी बच्चों पर लुटाई, अब अंतिम विदाई को भी तरस रहीं अस्थियां!

    Rajasthan News: अमावस्या की रात से 24 घंटे खुलेंगे करणी माता मंदिर के पट, दर्शन के लिए उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़

    Rajasthan News: अमावस्या की रात से 24 घंटे खुलेंगे करणी माता मंदिर के पट, दर्शन के लिए उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
    Social Media Buttons
    error: Content is protected !!
    Verified by MonsterInsights