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साक्षात नर्क बना शिक्षा का मंदिर, पोस्ट ऑफिस के सामने खंडहर स्कूल बना कचरा घर, जिम्मेदार मौन

साक्षात नर्क बना शिक्षा का मंदिर: पोस्ट ऑफिस के सामने खंडहर स्कूल बना कचरा घर, जिम्मेदार मौन

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समाचार गढ़, श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ के मुख्य बाजार में पोस्ट ऑफिस के ठीक सामने स्थित राजकीय विद्यालय की पुरानी शाखा आज साक्षात नर्क का दृश्य प्रस्तुत कर रही है। राजाओं के जमाने में स्थापित यह ऐतिहासिक राजकीय स्कूल वर्षों की घोर उपेक्षा के चलते अब पूरी तरह खंडहर और कचरा घर में तब्दील हो चुकी है।

कभी शिक्षा का केंद्र रहा यह भवन अब पांच फीट ऊंचे कचरे के ढेर, टूटी-फूटी दीवारों और बदबूदार गंदगी से घिरा हुआ है। बरसात के दिनों में परिसर में पानी भर जाता है, जिससे मच्छरों का प्रकोप और बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है।

यह भूमि राजकीय सीनियर माध्यमिक विद्यालय की धरोहर है और दो पट्टा की बेशकीमती सरकारी जमीन होने के बावजूद इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं। आरोप है कि वर्षों से यहां जो भी प्रधानाचार्य पदस्थापित होकर आए, उन्होंने इस शाखा की बदहाली में कोई रुचि नहीं ली।

सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि परिसर में आवारा गौवंश खुलेआम विचरण करता है, चारों ओर फैली पॉलीथीन और कचरे को खाता है, जिससे बीमार होकर उनकी मौत तक हो रही है। आसपास के दुकानदार और रेहड़ी-थैले वाले भी बेधड़क यहां कचरा डाल रहे हैं, जिससे हालात और भयावह हो गए हैं।

हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका मण्डल, शिक्षा विभाग, विद्यालय प्रशासन, स्वच्छता शाखा और उपखण्ड प्रशासन — सभी इस गंभीर समस्या से आंखें मूंदे बैठे हैं। बाजार जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में इस तरह का खंडहर दुर्घटना, बीमारी और जनहानि को खुला निमंत्रण दे रहा है।

स्थानीय नागरिकों की मांग है कि

  • तत्काल यहां विशेष सफाई अभियान चलाया जाए
  • कचरा डालने वालों पर जुर्माना व कार्रवाई हो
  • गौवंश की सुरक्षा के लिए पॉलीथीन मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाए
  • और इस ऐतिहासिक स्कूल भवन का पुनर्निर्माण या सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जाए

अब सवाल यह है कि किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि के बाद ही प्रशासन जागेगा, या समय रहते जिम्मेदार अपना दायित्व निभाएंगे?

पोस्ट ऑफिस के सामने स्थित खंडहर राजकीय स्कूल की दीवार से सटाकर बना अस्थायी पेशाब स्थल। सड़क पर बने गड्ढे में जमा पेशाब को पीता गौवंश। फिलहाल दो पट्टियों के टुकड़े लगाकर गड्ढा ढकने का प्रयास किया गया है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। गड्ढे में कई बार आमजन के पैर फिसलने से चोटिल हो चुके हैं, वहीं आए दिन दोपहिया व चौपहिया वाहनों के टायर फंसने से वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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