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RBI का बड़ा प्रयोग: ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों का ट्रायल शुरू, जानिए क्यों चुने गए छोटे नोट

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समाचार-गढ़ 30 जुलाई 2026।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में पॉलीमर (प्लास्टिक) बैंक नोटों की शुरुआत की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि आरबीआई को ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल करने की मंजूरी मिल गई है। ये नोट मौजूदा कागजी नोटों के साथ ही चलन में रहेंगे। यानी फिलहाल कागजी नोटों को बंद नहीं किया जाएगा। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में ₹100 और ₹500 जैसे बड़े मूल्यवर्ग के नोट भी पॉलीमर में जारी किए जा सकते हैं।

आरबीआई ने ट्रायल के लिए ₹10 और ₹20 के नोटों का चयन सोच-समझकर किया है। ये नोट देश में सबसे अधिक प्रचलन में रहने वाले नोटों में शामिल हैं और कुल करेंसी नोटों की संख्या का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा हैं, जबकि कुल मुद्रा मूल्य में इनकी हिस्सेदारी केवल 1.4 प्रतिशत है। ऐसे में यदि परीक्षण के दौरान किसी तरह की तकनीकी या परिचालन संबंधी समस्या आती है, तो उसका वित्तीय व्यवस्था पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

इसके पीछे एक और महत्वपूर्ण वजह एटीएम इंफ्रास्ट्रक्चर भी है। पॉलीमर नोटों की मोटाई, बनावट और लचीलापन कागजी नोटों से अलग होता है। चूंकि ₹10 और ₹20 के नोट एटीएम से अपेक्षाकृत कम निकाले जाते हैं और अधिकतर सीधे बैंक शाखाओं या स्थानीय बाजारों में उपयोग होते हैं, इसलिए इनके ट्रायल से देशभर के एटीएम और कैश रिसाइक्लर मशीनों में बड़े स्तर पर बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी।

आरबीआई का मानना है कि पॉलीमर नोट कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं। ये पानी, नमी, धूल और घिसावट से जल्दी खराब नहीं होते, जिससे इनकी उम्र कई गुना बढ़ जाती है। खासकर ₹10 और ₹20 के नोट रोजमर्रा के लेनदेन में सबसे अधिक इस्तेमाल होते हैं और जल्दी फट या खराब हो जाते हैं। ऐसे में पॉलीमर नोटों के इस्तेमाल से बार-बार नए नोट छापने और पुराने नोट बदलने पर होने वाला खर्च भी काफी कम किया जा सकेगा।

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