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19 वर्ष बाद बन रहा है यह विशेष योग अवश्य करें ये अचूक उपाय

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श्री गणेशाय नमः
19 वर्ष बाद बन रहा है यह विशेष योग अवश्य करें ये अचूक उपाय

क्षेत्र के श्री गणेश ज्योतिष कार्यालय के प्रसिद्ध ज्योतिषी राजगुरु पंडित देवीलाल उपाध्याय एवं आचार्य रामदेव उपाध्याय ने बताया कि शिव पूजन का सर्वोत्तम पावन श्रावण मास दिनांक 4 जुलाई 2023 मंगलवार से आरंभ होगा। इस वर्ष दो श्रावण मास होने के कारण श्रावण मास में शिव पूजन एवं पुरुषोत्तम मास में कुछ विशिष्ट धार्मिक कर्म के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त कर सकते हैं। आचार्य ने बताया कि श्रावण मास के साथ पुरुषोत्तम मास का दुर्लभ संयोग 19 वर्ष के बाद बन रहा है। आचार्य के अनुसार श्रावण मास के साथ पुरुषोत्तम मास का दुर्लभ संयोग 19 वर्ष पूर्व अंग्रेजी सन 2004 में बना था। इस वर्ष दिनांक 18 जुलाई 2023 से 16 अगस्त 2023 तक पुरुषोत्तम मास रहेगा।

आचार्य ने श्रावण मास को शिवपूजन के लिए सर्वोत्तम समय बताते हुए कहा कि इस वर्ष दिनांक 4 जुलाई 2023 से 17 जुलाई 2023 एवं 17 अगस्त 2023 से 31 अगस्त 2023 का समय शिव पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ समय रहेगा। इस दौरान आचार्य ने विभिन्न समस्याओं के निवारण हेतु कुछ अचूक उपाय भी बताए हैं जो निम्न हैं-

1. व्यापारिक बाधा निवारण-
आचार्य ने बताया कि जिन व्यापारियों के व्यापार में रुकावट आ रही है या व्यापार में मंदी का दौर चल रहा है उन्हें श्रावण मास में श्रद्धा एवं विश्वास पूर्वक वट वृक्ष के नीचे पीपल के पत्ते के ऊपर मिट्टी को गिला करके शिवलिंग बनाकर उस शिवलिंग की विधि पूर्वक वटकेश्वर महादेव के रूप में विधिपूर्वक पूजन करके फिर 7 बार विशेष रूप से शिवलिंग पर दही चढ़ाकर उस दही का अपने व्यापार स्थल पर स्वास्तिक बना देंवें और फिर शिवलिंग का विसर्जन कर देवें इस प्रकार का प्रयोग करने से लगभग 3 माह के बाद में व्यापार में उन्नति के प्रबल आसार रहते हैं।

2. बच्चे की बुद्धि के विकास हेतु
आचार्य ने बताया की यदि आपका बच्चा मंदबुद्धि या विद्या में कमजोर हैं तो कृपया श्रावण मास में शिवलिंग पर बच्चे के हाथ से दूध में चीनी मिलाकर विधि पूर्वक आस्था के साथ भगवान शिव का अभिषेक करवाएं इस प्रयोग से बच्चे की बुद्धि के विकास के प्रबल आसार रहते हैं।

3.लक्ष्मी प्राप्ति और सांसारिक सुख हेतु
आचार्य ने बताया कि यदि आप किसी भी प्रकार की आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं एवं आर्थिक कमजोरी के कारण सांसारिक सुख से वंचित है तो कृपया श्रावण मास में श्रद्धा पूर्वक भगवान शिव का गन्ने के रस से अभिषेक अवश्य करें।

श्रावण सोमवार व्रत रहस्य
आचार्य ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष प्रजापति के घर योग शक्ति से अपने शरीर का त्याग किया था तब उससे पहले देवी सती ने हर जन्म में महादेव को पति के रूप में पाने का प्रण किया था और दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से पिता हिमाचल माता रानी नैना के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था। पार्वती ने युवा अवस्था में श्रावण मास में निराहार रहकर कठोर व्रत के माध्यम से भगवान शिव को प्रसन्न करके उन्हें पति के रूप में प्राप्त किया था अतः अविवाहित कन्याओं को सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए सावन मास में संभवत: निराहार रहकर व्रत करना चाहिए।

पुरुषोत्तम मास में क्या करें ?
आचार्य पुरुषोत्तम मास का महत्व समझाते हुए बताया कि पुरुषोत्तम मास को सभी महीनों में श्रेष्ठ माना जाता है। आचार्य ने धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मानव जीवन के आध्यात्मिक उन्नति के लिए पुरुषोत्तम मास को सर्वोत्तम समय बताते हुए कहा कि मानव को अपने कल्याण के लिए पुरुषोत्तम मास में यथासंभव विष्णु सहस्त्रनाम, श्रीमद् -भागवत, रामचरितमानस आदि का पाठ करना या किसी विद्वान् से करवाना चाहिए। आचार्य ने बताया कि पुरुषोत्तम मास में दान- पुण्य, श्रीमद् भागवत कथा, रामचरितमानस आदि का पाठ, धर्म -कर्म, जप-तप, गौ सेवा, आदि कर्मों का कई गुना फल प्राप्त होता है।

पुरुषोत्तम मास में क्या न करें ?
आचार्य ने बताया की पुरुषोत्तम मास में शुभ कार्य निषेध माने गए हैं। पुरुषोत्तम मास के दौरान अन्नप्राशन, विवाह, देव प्रतिष्ठा, निर्माण कार्य आरंभ, गृह प्रवेश, वृषोत्सर्ग, कुंआ, बावड़ी, तालाब आदि का निर्माण कार्य आरंभ,अन्न प्रासन्न, उपनयन संस्कार, प्रथम व्रत आरंभ, वधू प्रवेश, राज्य अभिषेक, विशेष यज्ञ, गुरु दीक्षा आदि कार्य निषेध माने गए है।

राजगुरु पंडित देवीलाल उपाध्याय
ज्योतिष विद्
श्री डूंगरगढ़
9414429246
राजगुरु पंडित राम देव उपाध्याय
शास्त्री- आचार्य, B.a. (संस्कृत) ज्योतिष विद्
9829660721

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