समाचार गढ़, श्रीडूंगरगढ़। जैन समाज एवं क्षेत्र के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब जैनाचार्य आचार्य महाश्रमण के नाम से स्थापित होने वाली “आचार्य महाश्रमण इंटरनेशनल स्कूल” श्रृंखला के पहले शैक्षणिक भवन का शिलान्यास श्रीडूंगरगढ़ में विधिवत रूप से सम्पन्न हुआ। यह विद्यालय देशभर में प्रस्तावित 100 शैक्षणिक भवनों की श्रृंखला का पहला संस्थान है, जिसे श्रीडूंगरगढ़ के लिए बड़े गौरव के रूप में देखा जा रहा है।
एनएच-11 पर स्थित अपनी बेशकीमती भूमि शिक्षण संस्थान के लिए समर्पित करने वाले भीखमचंद–सुशीला पुगलिया ने न केवल भूमि दान की, बल्कि भवन निर्माण हेतु आर्थिक सहयोग देकर शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान प्रस्तुत किया। विद्यालय का शिलान्यास आज दोपहर 1:30 बजे विधिवत रूप से सम्पन्न हुआ।
श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा के महामंत्री विनोद बैद ने बताया कि यह शिलान्यास “चतुरमंगल शिलान्यास महोत्सव” के अंतर्गत एक साथ चार स्थानों—श्रीडूंगरगढ़, गंगाशहर, नोखा एवं भुज (गुजरात)—में सम्पन्न हुआ। इनमें श्रीडूंगरगढ़ में स्थापित होने वाला विद्यालय एक मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा।
शिलान्यास कार्यक्रम में भीखमचंद–सुशीला पुगलिया द्वारा विधिवत शिलान्यास किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार (राज्यमंत्री) उपस्थित रहे। महासभा के महामंत्री विनोद बैद एवं उपाध्यक्ष निर्मल गोखरू, समाजसेवी तुलसीराम चौरड़िया, पालिकाध्यक्ष मानमल शर्मा, पालिका प्रतिपक्ष नेत्री अंजू पारख, भाजपा ओबीसी मोर्चा के देहात जिला अध्यक्ष विनोद गिरी गुंसाई, मालचंद सिंघी, श्याम महर्षि, भंवरलाल दुगड़, तोलाराम मारू, मदन जोशी, शिवप्रसाद स्वामी, सूर्यप्रकाश गांधी, एडवोकेट ललित मारू, के एल जैन, जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, श्री ओसवाल पंचायत, तेरापंथ महिला मंडल, तेरापंथ युवक परिषद, किशोर मंडल व कस्बे की अन्य संस्थाओं के पदाधिकारी सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बता दें कि यह परियोजना न केवल जैन समाज, बल्कि पूरे क्षेत्र के विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित होंगे।















