समाचार गढ़ 25 जून 2026। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने साइबर अपराधियों के एक नए और खतरनाक तरीके को लेकर आमजन, व्यापारिक संस्थानों और वित्तीय विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस के अनुसार साइबर ठग इन दिनों खुद को कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि या किसी नियामक संस्था का अधिकारी बताकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वीके सिंह ने बताया कि अपराधी ईमेल, व्हाट्सएप या फोन कॉल के जरिए कर्मचारियों से संपर्क करते हैं और तत्काल भुगतान या गोपनीय वित्तीय लेन-देन का दबाव बनाते हैं। कई मामलों में कर्मचारी यह समझते हैं कि आदेश उनके वरिष्ठ अधिकारी की ओर से आया है और जल्दबाजी में रकम ट्रांसफर कर देते हैं।
पुलिस के अनुसार ठग पहले किसी ZIP फाइल, संदिग्ध लिंक या सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। जैसे ही फाइल खोली जाती है, मालवेयर मोबाइल या कंप्यूटर में प्रवेश कर महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर लेता है। इसके बाद अपराधी अधिकारी की पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी निर्देश जारी करते हैं और खातों में धनराशि ट्रांसफर कराने का प्रयास करते हैं।
ऐसे पहचानें साइबर ठगी
- तत्काल भुगतान या गोपनीय लेन-देन का दबाव बनाया जाए।
- अनजान नंबर या संदिग्ध ईमेल आईडी से संपर्क किया जाए।
- ZIP फाइल, लिंक या सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने को कहा जाए।
- किसी नियामक संस्था के नाम पर असामान्य संदेश प्राप्त हों।
बचाव के लिए पुलिस की सलाह
राजस्थान पुलिस ने कहा है कि किसी भी वित्तीय निर्देश की स्वतंत्र रूप से फोन कॉल या व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से पुष्टि जरूर करें। अज्ञात स्रोतों से प्राप्त लिंक, फाइल या सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने से बचें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सहित कोई भी नियामक संस्था व्हाट्सएप पर ZIP फाइल या सॉफ्टवेयर भेजकर निर्देश जारी नहीं करती।
इसके अलावा व्हाट्सएप वेब और लिंक्ड डिवाइस की नियमित जांच करें, एंटीवायरस को अपडेट रखें तथा सभी महत्वपूर्ण खातों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का उपयोग करें।
संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत करें शिकायत
यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस प्रकार की संदिग्ध गतिविधि करती है या साइबर धोखाधड़ी का प्रयास होता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930, निकटतम साइबर पुलिस थाना या राजस्थान पुलिस के साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 एवं 9257510100 पर शिकायत दर्ज कराएं।
पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका सतर्कता और समय पर सत्यापन है। बिना पुष्टि किए किसी भी वित्तीय निर्देश पर कार्रवाई करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।









