समाचार गढ़ 8 जून 2026, जयपुर। निशुल्क शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत अध्ययनरत विद्यार्थियों और निजी स्कूलों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2021-22 से 2025-26 तक की लंबित फीस पुनर्भरण राशि के भुगतान के लिए प्रदेशभर में 500.11 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बजट जारी किया है। इससे वर्षों से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे निजी स्कूलों को राहत मिलने की उम्मीद है।
जारी बजट के तहत चित्तौड़गढ़ जिले को कुल 8 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इनमें शैक्षणिक सत्र 2021-22 से 2024-25 तक के लिए 102.50 लाख रुपए तथा सत्र 2025-26 के लिए 797.50 लाख रुपए शामिल हैं। इस राशि से जिले के सैकड़ों निजी विद्यालयों को बकाया पुनर्भरण भुगतान मिल सकेगा और आरटीई के तहत अध्ययनरत बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं होगी।
बजट आवंटन सूची के अनुसार चित्तौड़गढ़ को संभाग मुख्यालय उदयपुर से भी अधिक राशि मिली है। उदयपुर जिले को सत्र 2021-22 से 2024-25 के लिए 246 लाख रुपए तथा सत्र 2025-26 के लिए 554 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार जयपुर जिले को सर्वाधिक लगभग 120 करोड़ रुपए का बजट मिला है। इसके बाद जोधपुर को 45 करोड़ रुपए और बीकानेर को 20 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक आदेश जारी कर पूल मद से राशि आहरित करने की अनुमति भी प्रदान कर दी है।
अभी भी 450 करोड़ रुपए के भुगतान का इंतजार
हालांकि निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि प्रदेशभर में आरटीई फीस पुनर्भरण के रूप में अभी भी करीब 950 करोड़ रुपए बकाया हैं। सरकार द्वारा 500 करोड़ रुपए जारी किए जाने के बाद भी लगभग 450 करोड़ रुपए के भुगतान का इंतजार बना हुआ है।
निजी स्कूल संघों ने पुनर्भरण की निर्धारित लागत राशि को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि वर्ष 2015 में आरटीई के तहत प्रवेशित प्रत्येक विद्यार्थी पर 17,582 रुपए का पुनर्भरण मिलता था, लेकिन बढ़ती महंगाई के बावजूद यह राशि बढ़ाने के बजाय घटाकर 13,500 रुपए कर दी गई, जिससे निजी विद्यालयों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
संघों का कहना है कि आरटीई के तहत प्रवेश देना अनिवार्य है, ऐसे में पुनर्भरण राशि का समय पर भुगतान और लागत राशि का यथार्थवादी निर्धारण आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों की शिक्षा और विद्यालयों की वित्तीय व्यवस्था दोनों प्रभावित न हों।









