द्वन्द्व में फस गया, स्वीकृत ट्रोमा सेंटर
साहित्यकार व पत्रकार डॉ. चेतन स्वामी की कलम से- विचित्र स्थिति में फसे हुए हैं, हम श्रीडूंगरगढ़ वासी। बड़ा प्रयास करके स्थानीय विधायक गिरधारीलाल महिया श्रीडूंगरगढ़ के लिए तीन अहम चीजों की स्वीकृति इस वर्ष के बजट में लेकर आए। ड्रेनेज, ट्रोमा सेंटर तथा बस स्टैंड के निर्माण की। ट्रोमा सेंटर के लिए एक माकूल जगह तय हो गई, वर्षों का विवाद खत्म हुआ, लोगों ने हर्ष मनाया। बस स्टैंड के लिए हाइवे के किनारे दस बीघा भूमि मांग रखी है, पर वह उलझाऊ प्रक्रिया में उलझी पड़ी है, उसके निर्माण के लिए कोई दानदाता भी आगे नहीं आ रहा है। दानदाता हो तो प्रक्रिया में तेजी आए। ड्रेनेज योजना हर साल खटाई में पड़ी रहती है। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के साथ इसका बनना एक आकाश कुसुम जैसा हो गया।
रही बात ट्रोमा सेंटर की। ट्रोमा सेंटर निर्माण के लिए एक ही परिवार के दो जने तैयार हैं। एक ओर मामा हैं और दूसरी ओर भांजा है। दोनों ने ही अपनी अर्जी राज्य सरकार को दे रखी है। असमंजस में फसे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने स्वीकृति के जंजाल की गैंद को चिकित्सा मंत्री के दरबार में फैंक रखी है। मुख्यमंत्री की सलाह बिना चिकित्सा मंत्री भी कुछ नहीं होते। दूसरे, निर्माण हेतु एक व्यक्ति की ही अर्जी होती तो तुरत स्वीकृति मिल जाती। फिर, इसका राजनीतिक पेच यह फसा हुआ है कि मामा को स्वीकृति दिलाने में वर्तमान विधायक गिरधारीलाल जी महिया लगे हैं और भानजे को स्वीकृति दिलाने में पूर्व विधायक श्री मंगलाराम जी गोदारा लगे हुए हैं। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री से इसकी स्वीकृति कौन ले पाता है।
चाहे मामा बनाए या भांजा, ट्रोमा सेंटर तथा उपजिला चिकित्सालय बने तो राहत मिले। राजनीति में लोग कामों की गणना कर वोट देते हैं। आचार संहिता लगने से पहले श्रीडूंगरगढ़ के उपरोक्त तीनों काम हो जाए तो वर्तमान विधायक को आगामी चुनाव में निश्चित इसका फायदा मिलेगा।











