समाचार-गढ़ 23 अगस्त, 2026।
राजस्थान में अपनी मांगों को लेकर पानी की टंकी, मोबाइल टावर या बिजली के पोल पर चढ़कर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ अब पुलिस सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है। ऐसे मामलों में पहले FIR दर्ज की जाएगी और प्रदर्शन के दौरान सरकारी मशीनरी पर हुए खर्च की वसूली भी संबंधित व्यक्ति से की जाएगी।
इस खर्च में मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों की उस दिन की ड्यूटी का खर्च, दमकल और एंबुलेंस के ईंधन से लेकर सरकारी वाहनों और अधिकारियों के इस्तेमाल तक का खर्च शामिल किया जाएगा।
डीजीपी राजीव शर्मा ने इस पूरी व्यवस्था का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी एडीजी क्राइम विपिन कुमार पांडेय को दी है।
मेडिकल जांच के बाद तय होगी कार्रवाई
पुलिस के प्रस्तावित एक्शन प्लान के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति पानी की टंकी, मोबाइल टावर या हाईटेंशन टावर पर चढ़कर अपनी जान जोखिम में डालता है, तो उसके नीचे उतरने के बाद सबसे पहले उसका मेडिकल कराया जाएगा।
अगर मेडिकल जांच में व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। लेकिन अगर वह मानसिक और शारीरिक रूप से फिट पाया जाता है, तो संबंधित थाना पुलिस उसके खिलाफ FIR दर्ज करेगी।
इसके बाद जांच अधिकारी प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल हुए सरकारी संसाधनों की पूरी जानकारी जुटाएगा।
पुलिस से लेकर बिजली-पानी विभाग तक देंगे खर्च का हिसाब
जांच अधिकारी सिविल डिफेंस, फायर, SDRF, जलदाय विभाग और बिजली विभाग समेत संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगेगा।
रिपोर्ट में यह जानकारी होगी कि प्रदर्शन के दौरान:
- कितनी सरकारी गाड़ियां मौके पर भेजी गईं
- कितने अधिकारी और कर्मचारी तैनात रहे
- कितने समय तक सरकारी अमला मौके पर लगा रहा
- बिजली या पानी की सप्लाई कितनी देर प्रभावित हुई
- दमकल और एंबुलेंस पर कितना ईंधन खर्च हुआ
इसके अलावा पुलिस अपने वाहनों और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों व अधिकारियों से जुड़ा खर्च भी रिपोर्ट में शामिल करेगी।
सभी विभागों से मिली जानकारी के आधार पर कुल खर्च निकाला जाएगा। इसके बाद जिला प्रशासन की मदद से यह राशि प्रदर्शन करने वाले व्यक्ति से वसूलने की कार्रवाई की जाएगी।
पैसे नहीं दिए तो संपत्ति कुर्क हो सकती है
अगर संबंधित व्यक्ति सरकारी खर्च की राशि जमा नहीं करता है तो कोर्ट के जरिए उसे बार-बार नोटिस भेजा जाएगा। जरूरत पड़ने पर कोर्ट के आदेश के बाद उसके नाम की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
हर महीने सामने आ रहे करीब 7 ऐसे मामले
एडीजी क्राइम की ओर से जिलों से रिपोर्ट मांगे जाने पर सामने आया कि राजस्थान में हर महीने कम से कम 7 ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें लोग अपनी मांगों को लेकर पानी की टंकी, बिजली के पोल या मोबाइल टावर पर चढ़ जाते हैं।
इनमें ज्यादातर मामले जमीन विवाद, भर्ती परीक्षाओं और पुलिस केस से जुड़े विवादों से संबंधित होते हैं। कई मामलों में प्रदर्शनकारी ज्वलनशील पदार्थ लेकर आत्महत्या करने की धमकी भी देते हैं।
पुलिस का कहना है कि BNS में ऐसे मामलों से निपटने के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
एडीजी क्राइम विपिन कुमार ने कहा कि इस तरह के प्रदर्शन में प्रशासन का काफी समय और संसाधन खर्च होते हैं। इसी वजह से सरकारी खर्च की रिकवरी की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है।
2011 में टंकी से कूदने के बाद हुई थी युवक की मौत
ऐसी घटनाओं का राजस्थान में पुराना इतिहास भी रहा है।
17 मार्च 2011 को सवाई माधोपुर के मानटाउन इलाके में पुलिस कार्रवाई के विरोध में दो युवक पानी की टंकी पर चढ़ गए थे। पुलिस से बातचीत विफल होने के बाद एक युवक राजेश मीणा टंकी से नीचे कूद गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
इसके बाद गुस्साई भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। इसी दौरान मानटाउन थाने के सीआई फूल मोहम्मद की गाड़ी पर पथराव हुआ और वह बेहोश हो गए। बाद में भीड़ ने उन्हें जीप में जिंदा जला दिया था।
हाल के वर्षों में भी लगातार सामने आए मामले
राजस्थान में पिछले कुछ समय में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं।
नवंबर 2024: SI भर्ती परीक्षा 2021 को रद्द करने की मांग को लेकर दो छात्र दो दिन तक पानी की टंकी पर चढ़े रहे। मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के हस्तक्षेप के बाद दोनों को नीचे उतारा गया।
30 जुलाई 2026: छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर एक युवती और दो छात्र गांधी नगर रेलवे स्टेशन की पानी की टंकी पर चढ़ गए। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की समझाइश के बाद तीनों नीचे उतरे।
7 अगस्त 2026: तीन संविदा नर्सिंगकर्मी ANM और नर्सिंग ऑफिसर की भर्ती से जुड़ी मांगों को लेकर जयपुरिया हॉस्पिटल की पानी की टंकी पर चढ़ गए। 8 अगस्त की देर रात उन्हें नीचे उतारा गया।
8 अगस्त 2026: दो नर्सिंगकर्मी अपनी मांगों को लेकर SMS हॉस्पिटल के चरक भवन की पानी की टंकी पर चढ़ गए। पुलिस की समझाइश के बाद उन्हें अगले दिन नीचे उतारा गया।
टंकियों की सुरक्षा पर सरकार पहले ही खर्च कर चुकी है ₹10 करोड़
ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार पहले भी कई कदम उठा चुकी है। जलदाय विभाग को करीब ₹10 करोड़ का बजट देकर पानी की टंकियों की सीढ़ियां बंद कराई गईं। कई टंकियों के आसपास कांटेदार जालियां लगाई गईं और कुछ जगह शुरुआती सीढ़ियां भी तोड़ दी गईं।
इसके बावजूद प्रदर्शनकारी गेट का ताला तोड़कर या एल्युमीनियम की सीढ़ियों का इस्तेमाल करके टंकियों पर चढ़ने में कामयाब हो जाते हैं।
बीकानेर में पहले ही हो चुकी है ऐसी कार्रवाई
बीकानेर की एसपी रहते हुए IPS अधिकारी तेजस्विनी गौतम ऐसी कार्रवाई कर चुकी हैं।
2024 में श्रीडूंगरगढ़ में राजेंद्र नाम का एक युवक पुलिस केस खत्म करने की मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गया था। करीब 9 घंटे बाद जब वह नीचे उतरा तो उसका मेडिकल कराया गया।
इसके बाद एसपी के निर्देश पर राजेंद्र के खिलाफ आत्महत्या के प्रयास और सरकारी काम में बाधा डालने की रिपोर्ट दर्ज की गई।
साथ ही पुलिस, दमकल और एंबुलेंस पर हुए खर्च का हिसाब तैयार कराया गया। यह खर्च करीब ₹11.50 लाख निकला। इसके बाद जिला प्रशासन की मदद से राजेंद्र को इस राशि की वसूली का नोटिस दिया गया।
अब राजस्थान पुलिस इसी तरह की कार्रवाई को पूरे प्रदेश में व्यवस्थित रूप से लागू करने की तैयारी कर रही है, ताकि मांग मनवाने के लिए जान जोखिम में डालकर सरकारी संसाधनों को लंबे समय तक इस्तेमाल कराने की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।









