समाचार-गढ़ 19 अगस्त, 2026।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिक जरूरत पड़ने पर अपने बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि बढ़ती उम्र का मतलब असुरक्षा या अपमान के साथ जीना नहीं है। बुजुर्गों को सम्मान, सुरक्षा और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार है।
लखनऊ के मकान से जुड़ा था मामला
मामला लखनऊ के विकास नगर निवासी रवि कांत गुप्ता से जुड़ा था। उन्होंने जून 2022 में अपने बेटे को मकान से बाहर करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन दिया था। यह मकान उनकी खुद की खरीदी हुई संपत्ति थी।
मामला तब सामने आया जब उनकी 81 वर्षीय मां को घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहना पड़ा। SDM ने बेटे की बेदखली का आदेश दिया, जिसे जिला मजिस्ट्रेट ने भी बरकरार रखा।
हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा
बेटे और बहू ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि 2007 का कानून बुजुर्गों को बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने का अधिकार नहीं देता और दोनों आदेश रद्द कर दिए थे।
अब सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बुजुर्गों के भरण-पोषण और सुरक्षा के लिए जरूरी होने पर ट्रिब्यूनल बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने का आदेश दे सकता है।
बुजुर्गों की गरिमा सबसे जरूरी
कोर्ट ने कहा कि सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने बुजुर्गों को कितना सम्मान, संरक्षण और गरिमा देता है। कोर्ट ने 2021 के एस. वनिता बनाम डिप्टी कमिश्नर मामले का भी हवाला दिया, जिसमें बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए बेदखली को उचित उपाय माना गया था।









