समाचार गढ़ 16 मार्च 2026। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष खरमास (मलमास) की शुरुआत 15 मार्च 2026 से होगी, जो 13 अप्रैल 2026 तक रहेगा। इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नया व्यापार शुरू करना और वाहन या संपत्ति खरीदने जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। ज्योतिष मान्यता के अनुसार 14 मार्च की मध्यरात्रि में सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास का आरंभ हो जाएगा।
सूर्य के राशि परिवर्तन से शुरू होता है खरमास
ज्योतिषाचार्य के अनुसार सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की प्रक्रिया को संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं तब खरमास की शुरुआत मानी जाती है। इस अवधि में सूर्य 13 अप्रैल तक मीन राशि में ही रहेंगे और मेष संक्रांति के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा।
साल में दो बार लगता है खरमास
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वर्ष में दो बार खरमास आता है। पहला मध्य मार्च से मध्य अप्रैल के बीच और दूसरा मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी के बीच माना जाता है। जब सूर्य धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह अवधि खरमास कहलाती है।
इन मांगलिक कार्यों पर रहती है रोक
खरमास के दौरान हिंदू धर्म में बताए गए कई शुभ कार्य नहीं किए जाते। इस अवधि में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, नए व्यापार की शुरुआत, वधू प्रवेश, नामकरण, मुंडन, यज्ञोपवीत जैसे संस्कारों को टाल दिया जाता है।
पूजा-पाठ का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भले ही मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है, लेकिन यह समय पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस दौरान प्रतिदिन सूर्य देव को तांबे के पात्र से अर्घ्य देना, सूर्य मंत्रों का जाप करना और दान-पुण्य करना विशेष फलदायी माना गया है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
खरमास के दौरान तामसिक भोजन, शराब आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही नया वाहन, संपत्ति या अन्य बड़ी वस्तुओं की खरीदारी से भी बचने की सलाह दी जाती है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार इस अवधि में नया कार्य शुरू करने से अपेक्षित सफलता मिलने की संभावना कम होती है।
13 अप्रैल को होगा खरमास का समापन
पंचांग के अनुसार 13 अप्रैल 2026 को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही मेष संक्रांति होगी और इसके साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा। इसके बाद विवाह सहित सभी मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो सकेंगे।










