समाचार गढ़ 29 अप्रैल 2026। दिल्ली में एक गंभीर अपराध के मामले में आरोपी के ऑनलाइन गेमिंग की लत और भारी कर्ज में फंसे होने की बात सामने आई है। डॉक्टरों का कहना है कि गेमिंग की लत, नशे और मानसिक समस्याओं के कारण अपराध बढ़ रहे हैं।
सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित करने के लिए नए नियम बनाए हैं, जो 1 मई से लागू होंगे। लेकिन इन नियमों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैंः
मुख्य बातेंः
1. कानून बनाने का अधिकारः
संविधान के अनुसार जुआ और सट्टेबाजी पर कानून बनाने का अधिकार राज्यों के पास है, केंद्र के पास नहीं। फिर भी केंद्र सरकार नियम बना रही है।
2. बच्चों की सुरक्षा पर कमीः
नए नियमों में बच्चों को पैसे वाले गेम्स से दूर रखने के स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं, जबकि पहले इस पर सलाह दी जा चुकी है।
3. राष्ट्रीय सुरक्षा और अपराधः
कुछ विदेशी गेमिंग ऐप्स के जरिए साइबर अपराध, हवाला और कट्टरपंथ जैसी गतिविधियों के मामले सामने आए हैं। नए नियमों में इन पर सख्त सजा का प्रावधान नहीं है।
4. टैक्स चोरी का मुद्दाः
विदेशी गेमिंग कंपनियों पर बड़े स्तर पर टैक्स चोरी के आरोप हैं, लेकिन नियमों में इसे रोकने के लिए ठोस उपाय नहीं दिखते।
5. प्रतिबंध को लेकर भ्रमः
सरकार ने सट्टेबाजी और जुए पर रोक का दावा किया है, लेकिन नियमों में यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में इन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा है या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर नियमों के कारण ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी गेमिंग को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे बच्चों का भविष्य और देश की अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकते हैं।















