समाचार गढ़। राजस्थान में पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों को लेकर हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयोग को निर्देश देते हुए कहा कि वह पांच दिन के भीतर चुनाव की प्रस्तावित तारीख अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि ओबीसी आयोग सोमवार तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की संभावित तारीख बताए, जबकि राज्य सरकार को भी उसी दिन तक वार्डों की लॉटरी प्रक्रिया कब पूरी होगी, इसकी जानकारी कोर्ट को देनी होगी।
सुनवाई में राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह और ओबीसी आयोग के सदस्य सचिव भी उपस्थित रहे। इस दौरान हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि पहले दिए गए न्यायालय के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि पूर्व में तय समयसीमा के बावजूद चुनाव कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया, जो न्यायालय के आदेशों की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।
इस पर राज्य चुनाव आयुक्त ने अदालत को बताया कि आयोग की चुनाव संबंधी सभी तैयारियां पूरी हैं, लेकिन सरकार की ओर से आरक्षण का अंतिम वर्गीकरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही सरकार लॉटरी प्रक्रिया पूरी कर आयोग को आवश्यक जानकारी देगी, आयोग दो दिनों के भीतर चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के लिए तैयार है।
ओबीसी आयोग को भी अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा कि सरकार द्वारा आयोग के गठन के कई महीने बाद भी रिपोर्ट क्यों प्रस्तुत नहीं की गई। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि समय पर कार्य पूरा नहीं हो सकता तो इसकी जानकारी पहले दी जानी चाहिए थी।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 22 मई को दिए अपने आदेश में राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि अब तक चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं होने पर अदालत ने मामले में सख्ती दिखाई है।









