छोटे अणुव्रत, बड़ा परिवर्तन: आचार्य तुलसी के विचारों से प्रेरित हुआ श्रीडूंगरगढ़
समाचार गढ़, श्रीडूंगरगढ़ | 6 जनवरी 2025
अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के निर्देशन में अणुव्रत समितियों के प्रशिक्षण, साधना एवं समन्वय के उद्देश्य से आयोजित योगक्षेम अणुव्रत संगठन यात्रा कार्यक्रम के अंतर्गत रविवार को राष्ट्रीय पदाधिकारियों का श्रीडूंगरगढ़ आगमन हुआ। इस दौरान मालू स्थित अणुव्रत सेवा केंद्र में अणुव्रत समिति की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जो सेवा केंद्र व्यवस्थापिका साध्वी संगीतश्री एवं साध्वी डॉ. परम प्रभा के सानिध्य में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साध्वी संगीतश्री ने कहा कि आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आंदोलन के माध्यम से केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज को नैतिकता, प्रामाणिकता और संयम का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि संतों के मार्गदर्शन के बिना समाज दिशाहीन हो जाता है और आचार्य तुलसी ने छोटे-छोटे अणुव्रत नियमों के जरिए देश को सही जीवन-दृष्टि प्रदान की।
साध्वी डॉ. परम प्रभा ने कहा कि आचार्य तुलसी के सपनों और ध्येय ने असंख्य लोगों का जीवन बदला है। अणुव्रत को अपनाने से लोगों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आया है, व्यापार में प्रामाणिकता बढ़ी है और नशामुक्ति को भी मजबूती मिली है।
कार्यक्रम में सत्यनारायण स्वामी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए अणुव्रत के विभिन्न प्रकल्पों की जानकारी दी। अणुव्रत संगठन यात्रा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. कुसुम लूनिया ने यात्रा के उद्देश्य और गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए डिजिटल डिटॉक्स, सदस्यता अभियान, जीवन विज्ञान एवं अणुव्रत आंदोलन की वर्तमान प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।
पर्यावरण प्रकल्प की राष्ट्रीय संयोजक डॉ. नीलम जैन ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए इको-फ्रेंडली थैलों के उपयोग का आह्वान किया।
कार्यक्रम में अणुव्रत समिति के विशाल स्वामी, तुलसीराम चोरड़िया, अशोक बेद, शुभकरण पारीक, अनिल धायल, कुंभाराम घिंटाला, मुकेश स्वामी, अशोक झाबक, पवन सेठिया, मधु झाबक, दीपमाला डागा, सुनीता डागा, मंजू झाबक सहित तेरापंथ युवक परिषद के पदाधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
इस अवसर पर सुमित बरड़िया ने अणुव्रत गीत का भावपूर्ण गायन किया, वहीं केएल जैन ने मंच संचालन करते हुए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के बाद केंद्रीय पदाधिकारियों ने स्थानीय समिति कार्यकर्ताओं की बैठक भी ली और अणुव्रत संदेशों को और अधिक व्यापक स्तर पर प्रसारित करने का आह्वान किया।
बैठक में अणुव्रत वाटिका निर्माण, अणुव्रत पत्रिका एवं अणुव्रत बाल पत्रिका की सदस्यता बढ़ाने के लक्ष्य निर्धारित किए गए तथा स्थानीय समिति का बैंक खाता खुलवाने के निर्देश भी दिए गए। इस दौरान समिति कार्यकर्ताओं ने वर्ष 2025 में 20 अणुव्रत पत्रिका और 50 अणुव्रत बाल पत्रिका के सदस्य बनाने का लक्ष्य सर्वसम्मति से स्वीकार किया।











