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श्रीडूंगरगढ़ में ठेला–रेहड़ी मजदूरों का संघर्ष तेज, संघर्ष समिति का गठन – पालिका प्रशासन के खिलाफ सोमवार को निकलेगी रैली

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समाचार गढ़, 27 सितम्बर 2025, श्रीडूंगरगढ़।
नगर पालिका प्रशासन और ठेला–रेहड़ी मजदूरों के बीच टकराव गहराता जा रहा है। रोज़ाना सब्जी, फल और मनिहारी का सामान बेचकर अपने परिवार का गुजारा करने वाले रेहड़ी–ठेला संचालकों को पालिका प्रशासन द्वारा हटाए जाने के बाद कस्बे में जबरदस्त विरोध शुरू हो गया है। शुक्रवार रात पालिका कार्मिक द्वारा तीन युवकों पर मुकदमा दर्ज करवाने के बाद आक्रोश और गहरा गया।

शनिवार को सीपीएम कार्यालय में पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया की मौजूदगी में सैकड़ों की संख्या में फल–सब्जी विक्रेता और मनिहारी बेचने वाली महिलाएं एकत्र हुईं। इस दौरान सर्वसम्मति से ‘फल, सब्जी, मनिहारी रेहड़ी मजदूर संघर्ष समिति’ का गठन किया गया। समिति में 11 सदस्य शामिल किए गए हैं, जो मजदूरों की समस्याओं और आंदोलन की रणनीति तय करेंगे।

मजदूरों की पीड़ा – “कहाँ जाएं रोज़ी कमाने?”

सभा में शामिल महिलाओं और मजदूरों ने कहा कि पालिका प्रशासन उनके सामान जब्त कर रहा है, जबकि यही उनकी रोज़ी–रोटी का सहारा है। सब्जी विक्रेता व मनिहारी का सामान बेचने वाली महिलाएं बोलीं – “हम सुबह से शाम तक धूप में बैठकर सब्ज़ी और मनिहारी का सामान बेचते हैं, तभी बच्चों का पेट भरता है। अब अगर यही ठेला–रेहड़ी हटा दी जाए तो हमारे परिवार भूखे मर जाएंगे।”

संघर्ष समिति की मांगें

संघर्ष समिति ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, विरोध जारी रहेगा। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं –

पालिका कार्मिक द्वारा दर्ज करवाए गए मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं।

जब्त किया गया सामान मजदूरों को लौटाया जाए।

रेहड़ी–ठेला लगाने के लिए बाजार में स्थायी स्थान निर्धारित किया जाए।

पालिका प्रशासन की “तानाशाही” और उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए।

सोमवार को निकलेगी रैली

बैठक में निर्णय लिया गया कि सोमवार को संघर्ष समिति के नेतृत्व में कस्बे में बड़ी रैली निकाली जाएगी और पालिका प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। मजदूरों ने कहा कि उनका संघर्ष रोज़ी–रोटी और अस्तित्व की लड़ाई है, जिसे दबाना आसान नहीं होगा।

पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया ने मजदूरों को संबोधित करते हुए आश्वस्त किया कि वे हर कदम पर उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि गरीब मजदूरों का हक़ छीना नहीं जा सकता और यदि प्रशासन ने अपनी मनमानी बंद नहीं की तो आंदोलन और उग्र होगा।

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