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Teachers’ Day 2026: PM मोदी का शिक्षकों को संदेश- ‘बचपन मरने नहीं देना’, बच्चों के टैलेंट से लेकर स्क्रीन टाइम तक कही बड़ी बात

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समाचार-गढ़ 5 सितंबर, 2026।

नई दिल्ली: शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल टीचर्स अवॉर्ड से सम्मानित शिक्षकों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों के भविष्य, उनकी प्रतिभा को पहचानने, बढ़ते स्क्रीन टाइम और रचनात्मक गतिविधियों से उन्हें जोड़ने जैसे कई अहम मुद्दों पर बात की।

प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से कहा कि हर बच्चा अलग प्रतिभा और क्षमता लेकर आता है। ऐसे में शिक्षक की जिम्मेदारी सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे आगे बढ़ाने की भी होनी चाहिए।

‘हर बच्चे में कोई न कोई खास ताकत होती है’

शिक्षकों से संवाद के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि संभव है कि कोई बच्चा पढ़ाई में बहुत अच्छा प्रदर्शन न करे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसमें प्रतिभा नहीं है।

उन्होंने शिक्षकों से सवाल किया कि क्या वे ऐसे बच्चों की छिपी हुई क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रयास करते हैं।

इस पर शिक्षकों ने बताया कि वे कक्षा में मौजूद हर बच्चे की अलग-अलग खूबियों, प्रतिभाओं और चुनौतियों को समझने की कोशिश करते हैं। उनका उद्देश्य बच्चों की क्षमता को पहचानकर उसी के अनुरूप उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना रहता है।

ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता पर भी हुई चर्चा

संवाद के दौरान एक शिक्षिका ने अपने शोध का विषय ब्रेस्ट कैंसर बताते हुए कहा कि आज भी कई महिलाएं इस विषय पर खुलकर बात करने में झिझकती हैं।

उन्होंने बताया कि उनका काम महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े शुरुआती संकेतों के प्रति जागरूक करने और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेने के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित है।

इस पर पीएम मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में चलाए गए ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता अभियान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब महिलाएं पहले की तुलना में ज्यादा खुलकर सामने आकर जांच करा रही हैं।

पीएम मोदी ने यह भी बताया कि वाराणसी में एक दिन में बड़ी संख्या में लोगों की स्क्रीनिंग किए जाने का रिकॉर्ड भी दर्ज हुआ था।

‘स्क्रीन टाइम अब एक तरह का एडिक्शन’

बच्चों में बढ़ते मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन इस्तेमाल को लेकर भी पीएम मोदी ने चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि स्क्रीन टाइम अब एक तरह का एडिक्शन बनता जा रहा है। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि बच्चों को खेलकूद और मैदान से जोड़ना इस समस्या से बाहर निकलने का एक प्रभावी माध्यम हो सकता है।

उन्होंने कहा कि अगर बच्चा खेलों में रुचि लेने लगे और नियमित रूप से मैदान में समय बिताए, तो धीरे-धीरे उसका ध्यान स्क्रीन से हट सकता है।

पीएम मोदी ने शिक्षकों और स्कूलों से बच्चों को क्रिएटिव गतिविधियों से जोड़ने के लिए ऐसे कार्यक्रमों को उनकी दिनचर्या का हिस्सा बनाने पर भी जोर दिया।

‘सिर्फ किताब और सिलेबस तक सीमित न रहें शिक्षक’

शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब शिक्षकों को सिर्फ किताबों और सिलेबस तक सीमित रहने के बजाय बच्चों की वास्तविक जिंदगी से भी जुड़ना होगा।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं है। शिक्षकों को बच्चों की रुचि, उनकी सोच, उनकी क्षमताओं और उनकी चुनौतियों को समझकर उनके व्यक्तित्व विकास में भी योगदान देना चाहिए।

‘बचपन मरने नहीं देना चाहिए’

पीएम मोदी ने अपने संबोधन के अंत में शिक्षा जगत को एक खास संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों का बचपन बचाए रखना जरूरी है और इसमें शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री के मुताबिक, बच्चों को सिर्फ पढ़ाई और किताबों तक सीमित रखने के बजाय उनके अंदर मौजूद जिज्ञासा, रचनात्मकता और खेल की भावना को भी जीवित रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बच्चों का बचपन बनाए रखने का सबसे बड़ा काम शिक्षक कर सकता है और इसके लिए जरूरी है कि शिक्षक के भीतर भी बचपन और सीखने की जिज्ञासा बनी रहे।

अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने नेशनल टीचर्स अवॉर्ड से सम्मानित सभी शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

 

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