1. अमेरिका की 30 दिन की विशेष छूट
समाचार गढ़ 6 मार्च 2026। अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिन का विशेष लाइसेंस दिया है, जो 3 अप्रैल तक मान्य रहेगा। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार यह कदम राष्ट्रपति ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत उठाया गया है ताकि वैश्विक तेल सप्लाई में स्थिरता बनी रहे। अमेरिका ने भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए यह अस्थायी राहत दी है।
2. किन शर्तों पर मिलेगा रूसी तेल
अमेरिकी ट्रेजरी के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ के लाइसेंस के अनुसार भारत केवल वही रूसी कच्चा तेल खरीद सकेगा जो 5 मार्च तक जहाजों में लोड हो चुका है। यानी नए कार्गो की खरीद नहीं होगी, बल्कि समुद्र में पहले से मौजूद तेल टैंकरों से ही सप्लाई की जाएगी। इससे पहले से भेजे गए तेल की डिलीवरी भारत तक पहुंच सकेगी।
3. मिडिल-ईस्ट तनाव से बढ़ी तेल कीमतें
मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव और इजराइल-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक करने से दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है। इसी कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
4. भारत की रणनीति और रूसी टैंकर
रिपोर्ट के अनुसार एशिया के समुद्री क्षेत्रों में लगभग 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल टैंकरों में भरा हुआ है। भारत इन टैंकरों से तेल खरीदने पर विचार कर रहा है, क्योंकि इससे ट्रांसपोर्ट का समय और लागत दोनों कम हो सकते हैं। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का लगभग 88% तेल आयात करता है।
5. भारत के लिए रूसी तेल क्यों महत्वपूर्ण
भारत के लिए रूसी तेल कई कारणों से अहम है। रूस भारत को वैश्विक कीमतों से कम दर पर तेल देता है, जिससे देश को सस्ता विकल्प मिलता है। इसके अलावा मिडिल-ईस्ट में तनाव के समय रूस एक स्थिर सप्लाई स्रोत बन जाता है। सस्ता तेल मिलने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और महंगाई पर भी काबू रखने में मदद मिलती है। फिलहाल इस छूट के कारण भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना कम मानी जा रही है।










