🚩श्री गणेशाय नम:🚩
📜 दैनिक पंचांग 📜
☀ 19 – Oct – 2025
☀ Sri Dungargarh, India
☀ पंचांग
🔅 तिथि त्रयोदशी 01:53 PM
🔅 नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी 05:50 PM
🔅 करण :
वणिज 01:53 PM
विष्टि 01:53 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग एन्द्र +02:04 AM
🔅 वार रविवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:36 AM
🔅 चन्द्रोदय +05:25 AM
🔅 चन्द्र राशि कन्या
🔅 सूर्यास्त 06:01 PM
🔅 चन्द्रास्त 04:45 PM
🔅 ऋतु शरद
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1947 विश्वावसु
🔅 कलि सम्वत 5127
🔅 दिन काल 11:24 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2082
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 11:56:00 – 12:41:39
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 04:29 PM – 05:15 PM
🔅 कंटक 10:24 AM – 11:10 AM
🔅 यमघण्ट 01:27 PM – 02:12 PM
🔅 राहु काल 04:35 PM – 06:01 PM
🔅 कुलिक 04:29 PM – 05:15 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 11:56 AM – 12:41 PM
🔅 यमगण्ड 12:18 PM – 01:44 PM
🔅 गुलिक काल 03:10 PM – 04:35 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन
📜 चोघडिया 📜
🔅उद्वेग 06:36:22 – 08:01:59
🔅चल 08:01:59 – 09:27:36
🔅लाभ 09:27:36 – 10:53:13
🔅अमृत 10:53:13 – 12:18:50
🔅काल 12:18:50 – 13:44:26
🔅शुभ 13:44:26 – 15:10:03
🔅रोग 15:10:03 – 16:35:40
🔅उद्वेग 16:35:40 – 18:01:17
🔅शुभ 18:01:17 – 19:35:44
🔅अमृत 19:35:44 – 21:10:12
🔅चल 21:10:12 – 22:44:40
🔅रोग 22:44:40 – 24:19:08
🔅काल 24:19:08 – 25:53:36
🔅लाभ 25:53:36 – 27:28:04
🔅उद्वेग 27:28:04 – 29:02:32
🔅शुभ 29:02:32 – 30:36:59
🚩लग्न तालिका 🚩
🔅 तुला चर
शुरू: 06:31 AM समाप्त: 08:51 AM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 08:51 AM समाप्त: 11:10 AM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 11:10 AM समाप्त: 01:14 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 01:14 PM समाप्त: 02:57 PM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 02:57 PM समाप्त: 04:25 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 04:25 PM समाप्त: 05:51 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 05:51 PM समाप्त: 07:27 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 07:27 PM समाप्त: 09:23 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 09:23 PM समाप्त: 11:38 PM
🔅 कर्क चर
शुरू: 11:38 PM समाप्त: अगले दिन 01:58 AM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: अगले दिन 01:58 AM समाप्त: अगले दिन 04:15 AM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 04:15 AM समाप्त: अगले दिन 06:31 AM
रूप चतुर्दशी 2025 — तिथि, महत्व और पूजा विधि
तिथि:
रूप चतुर्दशी कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है।
इस वर्ष यह 19 अक्टूबर 2025, रविवार को मनाई जा रही है।
क्यों मनाई जाती है रूप चतुर्दशी?
रूप चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है।
पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था।
इसी कारण इसे नरक से मुक्ति का प्रतीक पर्व माना जाता है।
रूप चतुर्दशी के दिन शरीर और आत्मा की शुद्धि, आरोग्य की कामना और रूप-तेज की प्राप्ति के लिए विशेष स्नान व पूजन का विधान है।
ऐसा कहा जाता है कि इस दिन स्नान, दीपदान और भगवान विष्णु व यमराज की पूजा से व्यक्ति को रूप, सौंदर्य, और पापों से मुक्ति मिलती है।
रूप चतुर्दशी की पूजा-विधि:
1. प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठें और तिल या उबटन लगाकर स्नान करें — इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है।
ऐसा करने से शरीर शुद्ध होता है और रोग दूर होते हैं।
2. स्नान के बाद नए या स्वच्छ वस्त्र पहनें।
3. घर में दीपक जलाएं, विशेषकर यमराज के नाम से एक दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा में जलाना अत्यंत शुभ माना गया है।
4. भगवान विष्णु, लक्ष्मी जी, और कृष्ण जी की पूजा करें।
5. शाम को घर-आंगन में दीपक जलाएं — यह दीपदान नरक से मुक्ति और सौंदर्य व सौभाग्य की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
6. स्त्रियाँ इस दिन रूप-सौंदर्य और सुख-समृद्धि की कामना से रूप चतुर्दशी व्रत कथा सुनती हैं।
आध्यात्मिक संदेश:
रूप चतुर्दशी हमें यह सिखाती है कि सच्चा रूप केवल बाहरी सौंदर्य नहीं, बल्कि अंतर्मन की शुद्धता, सच्चाई और सेवा भावना में निहित है।











