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शुरू होने से पहले ही मोतियाबिंद की जड़ काट देंगे 6 आयुर्वेदिक तरीके, नजर होगी तेज़

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समाचार गढ़, 17 जून, श्रीडूंगरगढ़। मोतियाबिंद लोगों के अंधेपन का प्रमुख कारण होने से भारत में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन गई है जिसके परिणामस्वरूप न केवल व्यक्तिगत पीड़ा होती है बल्कि बड़े आर्थिक नुकसान और सामाजिक बोझ भी पड़ता है। डब्ल्यूएचओ और नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ ब्लाइंडनेस (एनपीसीबी) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि देश में 22 मिलियन से अधिक लोग (12 मिलियन अंधे लोगों के बराबर) दृष्टिहीन हैं, इनमें से 80.1% मामलों में मोतियाबिंद होता है।

मोतियाबिंद को रोकने के आयुर्वेदिक तरीके
आयुर्वेद में प्राचीन भारत की संपूर्ण उपचार पद्धति, शरीर के दोषों -पित्त, कफ और वात को संतुलित करके उपचार और स्वास्थ्य को संरक्षित करने पर जोर देती है। आयुर्वेद कहता है कि आँखों की कोई भी बीमारी जैसे की मोतियाबिंद भी इन दोषों के असंतुलन से उत्पन्न होता है, विशेष रूप से पित्त दोष, जो आंखों और दृष्टि के लिए जिम्मेदार है। आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार, मोतियाबिंद को उचित आहार में सुधार और जीवनशैली में बदलाव की मदद से नियंत्रित और रोका जा सकता है।

वात दोष को रखें शांत
मोतियाबिंद के आयुर्वेदिक नियंत्रण में दोषों को संतुलित करना महत्वपूर्ण है। आँखों में वात दोष के असंतुलित होने पर आंखों में सूखापन और अपक्षयी परिवर्तन का कारण बन सकता है। इसके आलावा शरीर के मेटाबोलिज्म और परिवर्तन को नियंत्रित करने वाला पित्त दोष, संतुलन से बाहर होने पर सूजन और दृष्टि संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। आँखों के संरचना और लुब्रिकेशन से जुड़ा कफ दोष होने के कारण क्लॉउडी विज़न और आपकी आँखों में पानी आ जाता है और कई बार उनमें जलन या संक्रमण हो जाता है।

इन चीजों का करें सेवन
आहार संबंधी सुझाव पित्त को शांत करने पर ध्यान केंद्रित करती हैं, क्योंकि इसका असंतुलन आमतौर पर मोतियाबिंद से जुड़ा होता है। इसमें खीरे, खरबूजे और डेयरी उत्पादों जैसे ठंडे खाद्य पदार्थों का सेवन करना और पत्तेदार साग, फलियां, जौ और चावल जैसे अनाज में पाए जाने वाले मीठे, कड़वे और कसैले स्वाद को प्राथमिकता देना शामिल है।

खट्टी चीजों से बचें
मसालेदार, खट्टे और नमकीन खाद्य पदार्थों से बचना महत्वपूर्ण है जो पित्त को बढ़ा सकते हैं। शरीर को हाइड्रेटेड रखना अति आवश्यक है, इसलिए खूब पानी पीना और फलों और सब्जियों जैसे हाइड्रेटिंग खाद्य पदार्थ खाने से आंखों की नमी और संपूर्ण स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद मिलती है।

फल-सब्जियों का सेवन बढ़ाएं
जिन खाद्य पदार्थों में एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा मात्रा में हो जैसे क़ी हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, केला और मेथी), फल (जामुन, संतरे और पपीता), और जड़ी-बूटियाँ और मसाले (हल्दी, धनिया और केसर), ऑक्सीडेटिव तनाव को रोक सकते हैं, जो कि मोतियाबिंद बनने का एक प्रमुख कारण होता है।

घी का करें सेवन
घी जैसे गुड फैट्स को शामिल करना भी फायदेमंद है और यह आंखों सहित हमारे आँखों क़ी टिस्सुस को पोषण और चिकनाई देने में सहायक है। विशिष्ट आयुर्वेदिक खाद्य पदार्थों और जड़ी-बूटियों में त्रिफला, जो क़ी तीन फलों जिसमे (अमलाकी, बिभीतकी, और हरीतकी) का मिश्रण शामिल है, जो शरीर को पुनर्जीवित करने के लिए काफी उपयोगी माना जाता है, और आंवला (भारतीय करौदा), जो विटामिन सी और एंटीऑक्सिडेंट में उच्च है, आंखों के स्वास्थ्य के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता है। हल्दी, शरीर में होने वाले सूजन को रोकने ,में काफी जरूरी होता है और यह खासकर पित्त असंतुलन से संबंधित सूजन को प्रबंधित करने में मदद करता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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