समाचार-गढ़ 30 जुलाई 2026।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा लगातार पांचवीं मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले, शुरुआती कारोबार में आईटी शेयरों के समर्थन और ऑटो सेक्टर में जोरदार रिकवरी के दम पर गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि व्यापक बाजार में दबाव बना रहा और मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।
बीएसई सेंसेक्स 273.55 अंक यानी 0.35% की बढ़त के साथ 77,928.15 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 66.95 अंक (0.28%) चढ़कर 24,317.15 के स्तर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 77,440.91 तक फिसल गया था, लेकिन निचले स्तर से 566.18 अंकों की शानदार रिकवरी करते हुए 78,007.09 तक पहुंचा। वहीं निफ्टी भी 24,187.10 के इंट्राडे लो से उबरकर 24,342.95 तक पहुंचा।
हालांकि, बाजार की इस बढ़त के बावजूद निवेशकों की कुल संपत्ति में कमी दर्ज की गई। 29 जुलाई को बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹4,84,76,601.67 करोड़ था, जो 30 जुलाई को घटकर ₹4,83,22,238.50 करोड़ रह गया। यानी एक दिन में निवेशकों की पूंजी ₹1,54,363.16 करोड़ कम हो गई।
सेक्टोरल प्रदर्शन
दिन की शुरुआत में आईटी सेक्टर ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की। कारोबार के दौरान आईटी इंडेक्स डेढ़ फीसदी से अधिक चढ़ा, हालांकि अंत में इसकी बढ़त आधे फीसदी से कम रह गई। दूसरी ओर ऑटो सेक्टर ने मजबूत वापसी करते हुए 1.5% से अधिक की तेजी दर्ज की। जबकि रियल्टी सेक्टर सबसे कमजोर रहा और इसका इंडेक्स 2% से अधिक टूट गया।
ब्रॉडर मार्केट में दबाव साफ दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.35% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 15 बढ़त और 15 गिरावट के साथ बंद हुए। मारुति और महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयर रहे। वहीं अदाणी पोर्ट्स, इंडिगो और बजाज फिनसर्व में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई।
बीएसई पर कुल 4,407 शेयरों में कारोबार हुआ। इनमें 1,691 शेयर बढ़त, 2,528 शेयर गिरावट और 188 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए। कारोबार के दौरान 120 शेयर अपने एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचे, जबकि 79 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। इसके अलावा 9 शेयर अपर सर्किट और 9 शेयर लोअर सर्किट पर बंद हुए।
कच्चे तेल में फिर तेजी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल देखा गया। इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज पर सितंबर ब्रेंट कॉन्ट्रैक्ट दोपहर 12:40 बजे 92.50 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा, जो पिछले बंद स्तर से 2.33% अधिक था। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड करीब 8% चढ़कर 90.8 डॉलर प्रति बैरल के इंट्राडे हाई तक पहुंचा था और 90.74 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। बढ़ती तेल कीमतों से भारत के आयात बिल, महंगाई और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं।









