समाचार-गढ़ 31 जुलाई 2026।
अमेरिका की सीनेट में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करने वाला महत्वपूर्ण प्रस्ताव एक वोट से गिर गया। गुरुवार को हुई वोटिंग में प्रस्ताव के पक्ष में 49 और विरोध में 50 वोट पड़े, जबकि रिपब्लिकन सीनेटर डेव मैकॉर्मिक मतदान में शामिल नहीं हुए। यदि वह मतदान करते, तो परिणाम अलग हो सकता था।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ किसी भी नए सैन्य अभियान की शुरुआत करने से पहले अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी लें। प्रस्ताव पारित होने की स्थिति में राष्ट्रपति अकेले युद्ध संबंधी फैसला नहीं ले सकते थे। हालांकि, पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण यह प्रस्ताव फिलहाल आगे नहीं बढ़ सका।
दरअसल, हाल ही में ईरान पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों के बाद विपक्षी डेमोक्रेटिक सांसदों के साथ कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी मांग उठाई थी कि युद्ध जैसे अहम फैसले संविधान के अनुरूप कांग्रेस की अनुमति से ही लिए जाएं। उनका तर्क था कि युद्ध घोषित करने का अधिकार संसद के पास है, न कि केवल राष्ट्रपति के पास।
वहीं, रिपब्लिकन बहुमत ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में राष्ट्रपति को त्वरित निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, ताकि आपात परिस्थितियों में तत्काल कार्रवाई की जा सके।
इस घटनाक्रम के बीच ईरान ने भी अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने केश्म द्वीप पर हुई अमेरिकी बमबारी में नागरिकों की मौत के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि अमेरिका को इसकी कीमत चुकानी होगी। हालांकि, हमले में कितने लोगों की मौत हुई है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, जबकि ईरानी मीडिया ने कई नागरिकों के मारे जाने का दावा किया है।









