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2027 की जनगणना में भिखारियों की अलग गिनती नहीं होगी, कई पुराने आंकड़ों को क्यों बदला गया?

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समाचार-गढ़ 25 अगस्त, 2026।

नई दिल्ली: भारत में होने वाली आगामी जनगणना 2027 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं। इनमें सबसे चर्चित बदलाव यह है कि इस बार जनगणना के दौरान ‘भिखारी और आवारा’ की अलग श्रेणी में जानकारी दर्ज नहीं की जाएगी। अब तक गैर-आर्थिक गतिविधियों के तहत इस वर्ग को अलग से दर्ज किया जाता था।

सूत्रों के मुताबिक, नई जनगणना की प्रश्नावली से ‘भिखारी और आवारा वगैरह’ वाली कैटेगरी को हटा दिया गया है। इसके पीछे एक वजह यह बताई जा रही है कि पिछली जनगणनाओं में इस श्रेणी से अपेक्षाकृत सीमित और कम विश्वसनीय जानकारी सामने आई थी।

2011 में करीब 3.8 लाख लोगों ने खुद को बताया था भिखारी

पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो 2011 की जनगणना में करीब 3.8 लाख गैर-कामकाजी और सीमांत कामगारों ने खुद को ‘भिखारी और आवारा’ बताया था। इससे पहले 2001 में यह आंकड़ा करीब 6.3 लाख और 1991 में लगभग 5.4 लाख दर्ज किया गया था।

अधिकारियों के मुताबिक, इन आंकड़ों को पूरी तरह सटीक मानना मुश्किल है। इसकी एक वजह यह भी है कि सामाजिक बदनामी के डर से कई लोग खुद को इस श्रेणी में बताने से बचते हैं। जनगणना में कर्मचारी वही जानकारी दर्ज करता है, जो संबंधित व्यक्ति बताता है।

अब इस श्रेणी को अलग से दर्ज नहीं किए जाने के कारण भिखारियों की संख्या, उम्र, धर्म, राज्य, शिक्षा स्तर आदि के आधार पर अलग-अलग आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे।

माइग्रेशन की वजहों में प्राकृतिक आपदा भी शामिल

जनगणना के फॉर्म में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब किसी व्यक्ति के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने की वजहों में ‘प्राकृतिक आपदा’ को भी शामिल किया गया है।

इससे पहले रोजगार, कारोबार, पढ़ाई, शादी, जन्म के बाद स्थान परिवर्तन, परिवार के साथ जाना और अन्य कारण जैसी श्रेणियां मौजूद थीं। अब प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाले पलायन को भी अलग से दर्ज किया जा सकेगा।

माता-पिता की जानकारी भी होगी दर्ज

नई जनगणना में माता और पिता दोनों से जुड़ी जानकारी दर्ज करने के लिए भी प्रावधान किया गया है। इसमें उनके जन्म की तारीख, जन्म स्थान और धर्म जैसी जानकारियां शामिल होंगी।

सूत्रों के अनुसार, यह जानकारी खास परिस्थितियों में ली जाएगी, जैसे जब माता-पिता उसी घर में नहीं रहते हों या उनका निधन हो चुका हो।

माता-पिता से जुड़ी इस जानकारी से अलग-अलग पीढ़ियों में विवाह और धर्म परिवर्तन जैसे सामाजिक रुझानों को समझने में भी मदद मिल सकती है। साथ ही जन्म स्थान और तारीख से नागरिकता से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।

आधार, वोटर ID और पासपोर्ट की जानकारी भी मांगी जाएगी

नई जनगणना में लोगों से मोबाइल नंबर, आधार, वोटर ID और भारतीय पासपोर्ट नंबर जैसी जानकारियां भी मांगी जा सकती हैं, जहां ये उपलब्ध हों।

हालांकि, सूत्रों के मुताबिक जनगणना कर्मियों को लोगों पर दबाव बनाने के बजाय उन्हें इन जानकारियों की जरूरत और गोपनीयता के बारे में समझाने की ट्रेनिंग दी गई है। लोगों को बताया जाएगा कि जनगणना के दौरान उपलब्ध कराई गई जानकारी को गोपनीय रखा जाएगा।

अगर कोई व्यक्ति जानकारी साझा करने से इनकार करता है, तो संबंधित कॉलम खाली छोड़ा जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, इससे यह समझने में भी मदद मिलेगी कि लोग किन दस्तावेजों की जानकारी साझा करने में सबसे ज्यादा झिझक महसूस करते हैं।

यानी 2027 की जनगणना सिर्फ आबादी की गिनती तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि इसमें देश की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्थिति से जुड़े कई नए पहलुओं को भी दर्ज करने की तैयारी है।

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