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राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति द्वारा पुरस्कार घोषणा, हरीदास को हिन्दी, महेन्द्र मोदी को राजस्थानी व तसनीम को महिला लेखन पुरस्कार

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समाचार गढ़, श्रीडूंगरगढ़। राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, श्रीडूंगरगढ ने हिन्दी-राजस्थानी साहित्य सृजन हेतु दिए जाने वाले वार्षिक राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा कर दी है । संस्थाध्यक्ष श्याम महर्षि और उपाध्यक्ष बजरंग शर्मा ने बताया कि प्रतिष्ठित डॉ. नंदलाल महर्षि स्मृति हिन्दी सृजन पुरस्कार, पं. मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार और श्रीशिवप्रसाद सिखवाल स्मृति महिला लेखन पुरस्कार की घोषणा की गई है। संस्था के मंत्री रवि पुरोहित ने बताया कि डॉ. नंदलाल महर्षि स्मृति हिन्दी सृजन पुरस्कार इस वर्ष जोधपुर के लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरीदास व्यास को उनकी चर्चित आलोचना कृति ‘आलोचना की अंतर्ध्वनियॉं’ के लिए और पं. मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार मुंबई प्रवासी साहित्यकार महेन्द्र मोदी की लोकप्रिय संस्मरण कृति ‘आंगळी टूटी पाटी फूटी ’ के लिए घोषित किया गया है । आयोजन समन्वयक महावीर माली ने बताया कि आधी दुनिया के रूप में ख्यात महिला वर्ग में साहित्य के प्रोत्साहन हेतु गत वर्ष प्रारम्भ किया गया श्रीशिवप्रसाद सिखवाल स्मृति महिला लेखन पुरस्कार ज्ञानपीठ के नवलेखन पुरस्कार से समादृत चर्चित कथाकार जयपुर की तसनीम खान की कथाकृति ‘दास्तान-ए-हजरत’ को प्रदान किया जाएगा। संयुक्त मंत्री सत्यनारायण योगी ने बताया कि सभी पुरस्कार 14 सितम्बर, 2022 को श्रीडूंगरगढ में आयोज्य भव्य समारोह में अर्पित किये जायेंगे। पुरस्कार स्वरूप ग्यारह हजार रूपये नगद राशि के साथ सम्मान-पत्र, स्मृति-चिह्न, शॉल अर्पित किए जायेंगे ।

डॉ. हरीदास व्यास- 25 मई, 1955 को जन्मे कथाकार समालोचक डॉ. हरीदास व्यास अपनी तीक्ष्ण दृष्टि व रचनात्मक कौशल के लिए जाने जाते हैं। हिन्दी, पत्रकारिता एवं जनसंचार विषय से स्नातकोत्तर डॉ. व्यास की तिनकों का ताप, एक था पेड़ कहानी संग्रहों के अलावा आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी: सृष्टि एवं दृष्टि, आलोचना की अंतर्ध्वनियां, मीडिया, महिला एवं सांस्कृतिक परिदृश्य विषयक मीडिया विश्लेषण प्रकाशित हो चुके हैं। देश की तमाम प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित व्यास को वीर दुर्गादास राठौड़ सम्मान, राजस्थान साहित्य अकादमी का रांगेय राघव कथा सम्मान सहित अनेक पुरस्कार-सम्मान मिल चुके हैं।

महेन्द्र मोदी – 24 सितम्बर, 1951 को बीकानेर में जन्में महेन्द्र मोदी विविध भारती के सेवानिवृत्त चैनल प्रमुख हैं। कम्युनिकेट ग्रेट ब्रिटेन के विश्व सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले मोदी सी.आई.ए. कनाडा, ए.आई.बी.डी. मलेशिया सहित अनेक देशों द्वारा संचालित प्रोजेक्ट फॉर ब्राडकास्टिंग इन डवलपमेंट की पायोनियर टीम का नेतृत्व कर चुके हैं। रेडियो नाटक, रूपक, झलकियां व गीतों भरी कहानियांे के लिए ख्यात मोदी की अधजागी रातांःअधसूता दिन, स्वप्न चुभे शूल से, क्यूं उलझे तुम मन, आड्यां अळूझी जूंण, तिरसै सुपनां रा पुळ सहित कई कृतियां प्रकाशित हो चुकी है और अनेक पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं।

तसनीम खान – उपन्यासकार, कहानीकार व पत्रकार के रूप में अलहदा पहचान रखने वाली तसनीम अपनी रचनाओं में अभिव्यक्ति व चित्रण की बारीक कसीदाकारी और संवेदनशीलता के लिए विख्यात है। ‘ऐ मेरे रहनुमा’ उपन्यास के लिए भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन प्रतियोगिता के तहत अनुशंसित व प्रकाशित खान के उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद इन दिनों चर्चा में है। तसनीम की कहानी मेरे हिस्से की चॉंदनी का अनुवाद ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस में प्रकाशनाधीन है। लाडली मीडिया अवार्ड, शाकुंतलम सम्मान, नाराकास का चंदरबरदाई युवा सम्मान सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित खान आजीविका के लिए पत्रकारिता से जुड़ी हैं।

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