समाचार गढ़ 15 अप्रैल 2026। राजस्थान की पहचान मानी जाने वाली केर-सांगरी पर इस बार मौसम की मार भारी पड़ी है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने इस पारंपरिक फसल को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों की मेहनत लगभग बेकार हो गई है।
थार का मेवा कहलाने वाली केर-सांगरी का उत्पादन इस वर्ष करीब 60 से 70 प्रतिशत तक घट गया है। खास तौर पर बीकानेर, पाली और नागौर जैसे प्रमुख उत्पादन वाले जिलों में फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
इस भारी गिरावट का असर बाजार पर भी साफ दिख रहा है। उत्पादन कम होने के कारण केर-सांगरी के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं की पहुंच से यह पारंपरिक व्यंजन दूर होता जा रहा है।
आमतौर पर यह फसल वैशाख की तेज गर्मी में अच्छी तरह पनपती है, लेकिन इस बार मौसम के असामान्य बदलाव ने इसकी पूरी खेती को प्रभावित कर दिया है। परिणामस्वरूप न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि राजस्थान की पारंपरिक खाद्य पहचान पर भी इसका असर पड़ा है।
















