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मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन और चिकत्सा विभाग के सकारात्मक प्रयास, मातृ मृत्यु दर में आई आमूलचूल गिरावट

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समाचार गढ़, 13 जून, श्रीडूंगरगढ़। मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा के मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर प्रभावी अंकुश और मातृ शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा के निर्देश की अनुपालना में बीकानेर जिले में जिला प्रशासन तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सतत प्रयासों से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इन प्रयासों से जिले में मातृ मृत्यु दर में आमूल चूल गिरावट दर्ज हुई है। वर्ष 2022-23 में जहां प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 99 प्रसूताओं की मृत्यु हो जाती थी, वर्ष 2023-24 में यह संख्या घटकर 66 रह गई है। संख्या की बात करें तो 2022-23 में जिले में 55 मातृ मृत्यु दर्ज की गई थी, जो वर्ष 2023-24 में घटकर 34 रह गई। वर्तमान वर्ष के दो माह में मात्र दो मातृ मृत्यु ही दर्ज हुई है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को नीचे लाने के लक्ष्य को ही स्वास्थ्य विभाग के केंद्रीय लक्ष्य के रूप में स्थापित किया गया है। ऐसे में विभाग के सभी प्रयासों के केंद्र में मातृ मृत्यु नियंत्रण रहता है। जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि द्वारा मातृ शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता से मॉनिटर किया जा रहा है। पूर्व में प्रतिमाह 9 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चलाया जाता था, जिसे एक्सटेंड करते हुए प्रतिमाह 9, 18 तथा 27 तारीख को मनाया जाने लगा है। इस दिन सभी गर्भवतियों की प्रसव पूर्व जांच चिकित्सक द्वारा की जाती है। इसके चलते हाई रिस्क प्रेग्नेंट महिलाओं की अलग से सूची तैयार हो जाती है और उनके सुरक्षित प्रसव का प्रबंधन व योजना भी इस अभियान के अंतर्गत बनाई जाती है। डॉ गुप्ता ने बताया कि हाल ही में बीकानेर में नवाचार करते हुए समस्त जनता क्लीनिक पर भी प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का आयोजन शुरू किया गया है।

एनीमिया मुक्त राजस्थान अभियान ने बढ़ाया हीमोग्लोबिन

डॉ गुप्ता ने बताया कि राज्य सरकार के एनीमिया मुक्त राजस्थान अभियान के अंतर्गत किशोरियों व गर्भवतियों के हीमोग्लोबिन स्तर को ऊपर लाने के लिए बेहतरीन प्रयास हुए हैं। इसका परिणाम यह रहा कि गत वर्ष 7 ग्राम से कम हीमोग्लोबिन वाली महिलाओं की संख्या 4 हजार 373 थी जो वर्ष 2023-24 में घटकर मात्र 2 हजार 467 रह गई। आयरन की शक्ति के साथ गर्भवती की प्रसव के समय रिस्क की गुंजाइश भी बहुत कम हो जाती है। प्रसव के समय कॉम्प्लिकेशन से यदि रक्तस्राव अधिक भी हो जाए तो भी मातृ मृत्यु नहीं होती क्योंकि हीमोग्लोबिन का स्तर अच्छा होता है।

मॉनिटरिंग से सेवाएं हुई दुरुस्त

राज्य सरकार के प्रमुख अभियानों में शामिल सघन निरीक्षण अभियान ने भी मातृ मृत्यु कम करने में बड़ा योगदान दिया है। सरकार द्वारा प्रत्येक अस्पताल का प्रतिमाह बार-बार औचक निरीक्षण अभियान चला कर जांच करवाई गई। इससे चिकित्सकों व अन्य स्टाफ का मुख्यालय पर ठहराव बढ़ा है, लेबर रूम, लेबर टेबल, साजो सामान, आवश्यक दवाइयां की उपलब्धता, परिवहन व्यवस्थाएं, जननी सुरक्षा योजना आदि सभी बिंदुओं पर स्वास्थ्य केंद्र बेहतर हुए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र में ही सामान्य प्रसव सुविधाओं का विस्तार हुआ है। यही नहीं रेफरल सेवाएं भी सुदृढ़ हुई है जिससे मातृ मृत्यु को नीचे लाने में बड़ी मदद मिली है।

संस्थागत प्रसव बढ़ा, होम डिलीवरी ना के बराबर

जिले में वर्ष 2022-23 में 50,715 संस्थागत प्रसव हुए वहीं 2023-24 में 52,135 संस्थागत प्रसव हुए हैं। इसी कारण घर पर प्रसव की संख्या 161 से घटकर मात्र 8 रह गई। सुरक्षित संस्थागत प्रसव ने मातृ मृत्यु दर को नीचे लाने में बड़ा योगदान दिया है।

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