समाचार गढ़। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने अपनी रणनीति तेज करते हुए रूस के ऊर्जा ढांचे और सैन्य सप्लाई नेटवर्क को लगातार निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हालिया ड्रोन हमलों के बाद रूस में ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं, जबकि क्रीमिया की सुरक्षा और रसद व्यवस्था भी चुनौती का सामना कर रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक, यूक्रेन ने रूस के समारा क्षेत्र की तेल रिफाइनरी और अजोव सागर में तेल टैंकरों पर ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों के बाद कुछ इलाकों में ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। घरेलू मांग को प्राथमिकता देते हुए रूस ने ईंधन निर्यात पर प्रतिबंध और आपूर्ति नियंत्रण जैसे कदम उठाए हैं।
वहीं, यूक्रेन लगातार क्रीमिया को रूस से जोड़ने वाले पुलों और प्रमुख सप्लाई रूटों को निशाना बना रहा है। इससे क्रीमिया तक सैन्य रसद पहुंचाना रूस के लिए पहले के मुकाबले अधिक चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी हाल के दिनों में स्वीकार किया है कि मौजूदा हालात रूस के लिए “मुश्किल दौर” साबित हो रहे हैं।
चार साल से अधिक समय से जारी युद्ध में अब ड्रोन हमले निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। यूक्रेन रूस के अंदरूनी इलाकों तक हमले करने में सफल रहा है, जिससे ऊर्जा ढांचे और सैन्य प्रतिष्ठानों पर दबाव बढ़ा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से जारी युद्ध का असर रूस की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है और देश के बजट का बड़ा हिस्सा रक्षा एवं सैन्य खर्च पर जा रहा है।









