समाचार-गढ़ 21 अगस्त, 2026।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन फायरिंग में घायल हुए छात्र साहिल लोचाव के मामले को लेकर कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी घायल छात्र और कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा के साथ संसद मार्ग स्थित DCP कार्यालय पहुंचे।
राहुल गांधी ने छात्र की लिखित शिकायत पर FIR दर्ज करने और शिकायत का I/O नंबर उपलब्ध कराने की मांग की। पुलिस की ओर से तत्काल FIR दर्ज नहीं किए जाने के बाद राहुल गांधी DCP कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।
14 अगस्त को दी गई थी पुलिस शिकायत
कांग्रेस के मुताबिक, साहिल लोचाव ने 14 अगस्त को अपने वकीलों के जरिए दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत दी थी। आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद उन्हें न तो इसकी औपचारिक पावती मिली और न ही I/O नंबर दिया गया।
इसके बाद 17 अगस्त को ईमेल और फोन के जरिए भी मामले को उठाया गया, लेकिन शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई। राहुल गांधी का कहना है कि जब तक शिकायत औपचारिक रूप से दर्ज नहीं होती, वह पुलिस कार्यालय से नहीं हटेंगे।
कांग्रेस का आरोप है कि मामला संज्ञेय अपराध से जुड़ा होने के बावजूद पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही है। वहीं, DCP कार्यालय में पुलिस अधिकारियों और कांग्रेस नेताओं के बीच मामले को लेकर बातचीत जारी रही।
सुप्रीम कोर्ट ने बनाई 5 सदस्यीय कमेटी
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई पावर एक्सपर्ट कमेटी गठित की है।
कमेटी यह जांच करेगी कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान जरूरत से ज्यादा या अनुचित बल का इस्तेमाल तो नहीं हुआ। इसमें पैलेट गन, लाठी, इलेक्ट्रिक स्टिक और आंसू गैस के इस्तेमाल की परिस्थितियों की भी जांच की जाएगी।
कमेटी यह भी देखेगी कि कार्रवाई से पहले पर्याप्त चेतावनी दी गई थी या नहीं और पुलिस की कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार के बीच उचित संतुलन में थी या नहीं।
20 जुलाई को क्या हुआ था?
दरअसल, 20 जुलाई को छात्रों के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग और पैलेट गन चलाने का आरोप लगाया था।
दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान अधिकतम संयम बरता गया और परिस्थितियों के अनुसार न्यूनतम आवश्यक बल का इस्तेमाल किया गया।
पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर उठे सवालों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर तैनात RAF के गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। वहीं, CRPF ने भी कथित पैलेट फायरिंग को लेकर आंतरिक जांच शुरू की है।
फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि घायल छात्र की शिकायत पर FIR दर्ज होगी या नहीं, और कथित पैलेट फायरिंग की जिम्मेदारी तय करने के लिए आगे क्या कार्रवाई होती है।









