समाचार गढ़ 17 जून 2026। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों के पार्टी से बगावत कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की खबरों ने सियासी हलचल तेज कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, छह सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर शिंदे गुट में विलय की इच्छा जताई है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। बगावत करने वाले सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल का नाम सामने आ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि संजय दीना पाटिल ने हाल ही में पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज करते हुए खुद को उद्धव ठाकरे का सिपाही बताया था।
इस घटनाक्रम के बीच शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए भारी आर्थिक प्रलोभन दिया गया है। राउत ने दावा किया कि सांसदों को करोड़ों रुपये की पेशकश की गई और उन्हें चार्टर्ड विमानों के जरिए दिल्ली लाया गया।
राउत ने कहा कि उनके पास ऐसी जानकारी है कि कुछ सांसदों तक बड़ी रकम पहुंचाई गई है। हालांकि उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई सार्वजनिक साक्ष्य पेश नहीं किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (UBT) के केवल तीन सांसद—अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत—ही मौजूद रहे। इस पर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
उधर, उद्धव ठाकरे और पार्टी नेतृत्व बागी सांसदों से संपर्क साधने और उन्हें मनाने की कोशिश में जुटा हुआ है। पार्टी ने 18 जून को दिल्ली में संसदीय समिति की बैठक बुलाई है और सभी सांसदों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैठक में अनुपस्थित रहने वाले सांसदों के खिलाफ पार्टी अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है। यदि बगावत की खबरें सही साबित होती हैं तो वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई बड़ी टूट के बाद यह शिवसेना (UBT) के लिए दूसरा बड़ा झटका माना जाएगा।
फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हैं और आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण उभर सकते हैं।










