समाचार-गढ़ 6 अक्टूबर, 2026।
पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े घोषित आतंकवादी और लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने एक बार फिर इजरायल को लेकर भड़काऊ बयान दिया है। पिछले हफ्ते आयोजित एक खात्म-ए-नबुव्वत कॉन्फ्रेंस में भाषण देते हुए कसूरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना सऊदी अरब के पवित्र स्थलों की रक्षा करेगी और इजरायल को दुनिया के नक्शे से मिटा देगी। उसके इस बयान को लश्कर के लिए समर्थन जुटाने और धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
इजरायल विरोधी बयान के पीछे क्या है पूरा मामला?
कसूरी लंबे समय से सार्वजनिक सभाओं में इजरायल और भारत के खिलाफ बयान देता रहा है। मई 2026 में उसने पाकिस्तान के इजरायल को मान्यता देने की किसी भी संभावित कोशिश का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर समेत पाकिस्तानी नेतृत्व को भी धमकी दी थी। उसने कहा था कि अगर पाकिस्तान ने इजरायल को मान्यता देने की दिशा में कदम उठाया तो इसका गंभीर परिणाम होगा।
ताजा बयान ऐसे समय आया है जब कसूरी पाकिस्तान में सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिए लश्कर के समर्थन, फंड जुटाने और युवाओं को संगठन से जोड़ने की गतिविधियों में सक्रिय बताया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, लश्कर समर्थक टेलीग्राम अकाउंट्स पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में वह हथियारबंद गार्ड्स और वर्दीधारी सुरक्षाकर्मियों के बीच नजर आया है।
लश्कर-जैश और हमास के संपर्कों के बीच आया बयान
कसूरी का ताजा बयान पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के कुछ वरिष्ठ सदस्यों तथा हमास से जुड़े नेताओं के बीच हुई कथित बैठकों की रिपोर्टों के बीच सामने आया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले साल हमास की एक टीम ने बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय और पाकिस्तान सेना के एक ठिकाने का दौरा किया था। इसके अलावा, हमास से जुड़े वरिष्ठ नेताओं के रावलकोट, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कश्मीर एकजुटता दिवस के एक कार्यक्रम में भाषण देने की भी रिपोर्ट सामने आई थी। यह कार्यक्रम ‘अल-अक्सा फ्लड’ के बैनर के तहत आयोजित किया गया था।
इन घटनाओं का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों और हमास से जुड़े नेटवर्क के बीच संपर्कों पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन गतिविधियों की प्रकृति और इनके बीच किसी औपचारिक समन्वय के बारे में अलग-अलग रिपोर्टों में अलग दावे किए गए हैं।
पहलगाम हमले के बाद सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय कसूरी
सैफुल्लाह कसूरी को पहलगाम आतंकी हमले की साजिश से जुड़े प्रमुख चेहरों में बताया गया है। वह लश्कर-ए-तैयबा का डिप्टी चीफ भी है और भारत की सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर रहा है।
पहलगाम हमले के बाद से कसूरी की सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रियता की रिपोर्ट सामने आती रही है। रिपोर्टों के अनुसार, वह सभाओं में भाषण देने के साथ संगठन के लिए फंड जुटाने और युवाओं की भर्ती पर जोर देता रहा है।
मार्च में अब्राहम समझौते पर भी दिया था बयान
कसूरी ने मार्च में पाकिस्तान के अब्राहम समझौते में शामिल होने की किसी भी संभावना का विरोध किया था। मई के आखिर में लाहौर की एक रैली में उसने यह भी दावा किया था कि कश्मीर में हुए हमले के बाद उसकी पहचान और लोकप्रियता बढ़ी है। इससे पहले मई में उसने इजरायल को मान्यता देने के सवाल पर पाकिस्तानी नेतृत्व के खिलाफ सार्वजनिक धमकी भी दी थी।
इस तरह कसूरी के हालिया बयान को उसकी लगातार जारी इजरायल-विरोधी और भारत-विरोधी सार्वजनिक बयानबाजी की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही, उसके सार्वजनिक कार्यक्रमों में बढ़ती सक्रियता को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की नजर भी बनी हुई है।








