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पशुओं पर मंडराया लंपी रोग का साया, पशुधन संकट में, समय पर चेते सरकार, हालात हो सकते बेकाबू, पशु पालकों की उड़ी नींद

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समाचार गढ़, श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र पशु बाहुल्य क्षेत्र की श्रेणी में आता है क्योंकि यहां के पशुपालक काफी संख्या में पशुधन को रखते हैं लेकिन पिछले कई दिनों से यहां के पशुपालक काफी बेचैन एवं परेशान नजर आ रहे हैं। यहां श्री डूंगरगढ़ क्षेत्र के कई गांवों में पिछले कई दिनों से पशुओं में लंपी नामक चर्म रोग ने कई पशुधन की जान ले ली है तथा कई संख्या में पशुधन जिंदगी एवं मौत से लड़ रहे अपना जीवन बचाने की गुहार लगा रहे हैं। लंपी नामक चर्म रोग धीरे धीरे कई गांवों में फैलता जा रहा है पशुधन में बढ़ते जा रहे इस रोग को लेकर पशु पालकों की आंखों से नींद उड़ी हुई नजर आ रही है। श्री डूंगरगढ़ की गौशाला हो या फिर माना गांव की गौशाला हो या फिर ग्रामीण क्षेत्र सब जगह इस रोग ने धीरे-धीरे अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं पशुधन में पनप रहे इस रोग का कोई पुख्ता इलाज नहीं होने के कारण पशुधन अकाल मौत के मुंह में समा रहे हैं। हालांकि समय पर इलाज कराने पर पशुधन की जान को बचाया जा सकता है इस बीमारी से पशु पालकों को घबराने की बजाय अपने पशुधन का समय पर इलाज कराना चाहिए ताकि बीमारी को समय रहते काबू में करा जा सके । यह लंपी चर्म रोग सबसे ज्यादा गायो में देखा जा रहा है।

लंपी चर्म रोग क्या है – लंपी चर्म रोग सबसे ज्यादा गायों को जकड़ रहा है इस रोग से पशु के शरीर पर बड़े-बड़े फोड़े जैसे निकलते हैं
पशु खाना पीना छोड़ देता है तथा बुखार से पीड़ित हो जाता है एवं उदास उदास रहता है अगर पशु को समय पर इलाज नहीं मिलता है तो पशु की मौत तक हो जाती है।

बचाव ही उपाय – इस रोग से पीड़ित पशुधन को लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें तथा इलाज करवाएं समय पर इलाज ही इस रोग से बचाव है इस रोग से पीड़ित पशु को अन्य पशुओं से अलग रखें तथा पशु को पौष्टिक आहार दें । जहां तक संभव हो पीड़ित पशु को आइसोलेट रखने की कोशिश करें ताकि अन्य पशुओं में इस रोग का संक्रमण ना फैले । इस रोग का बचाव ही उपाय है।

समय पर इलाज से रोग को किया जा सकता काबू – लंपी चर्म रोग से पीड़ित पशु को अगर समय पर इलाज मिल जाए तो इस रोग को काबू किया जा सकता है । पशु चिकित्सकों ने बताया कि समय पर इलाज कराने से पशुधन को कोई खतरा नहीं रहता तथा पशु की जान बचाई जा सकती है। पशुपालकों को इस रोग से घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि समय पर इलाज कराने की जरूरत है।

जागरूक किसान ने किया यह काम – सातलेरा गांव के किसान गौरी शंकर शर्मा ने बताया कि उसके यहां दूध पीते दो छोटे बछड़ों में इस चर्म रोग का लक्षण दिखाई दिया । दोनों बछड़ों की गर्दन पर छोटी-छोटी गांठे दिखाई दी तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करके दोनों बछड़ों का इलाज करवाया । डॉक्टर द्वारा इलाज करने के बाद यह रोग पूरे शरीर पर ना फैलकर जहां था वहीं रुक गया । अब दोनों बछड़े स्वस्थ एवं तंदुरुस्त अवस्था में है।इसी प्रकार इसी गांव के किसान मोतीलाल तावनिया ने बताया कि उसकी दुधारू गाय में यह बीमारी हो गई तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर गाय का इलाज करवाया अब गाय बिल्कुल स्वस्थ है। गौरी शंकर शर्मा ने पशु पालकों से अपील करते हुए कहा है कि अपने पशुधन में किस बीमारी के कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें ताकि इस रोग को काबू में किया जा सके ।

आवारा पशु धन भगवान भरोसे – जिस प्रकार से लंपी चर्म रोग तेजी से फैलता हुआ दिखाई दे रहा है उस हिसाब से आवारा पशुधन का भगवान ही रखवाला नजर आ रहा है। क्योंकि पालतू पशु धन का तो पशुपालक समय पर इलाज करवा सकता लेकिन आवारा पशु धन का कोई धणी धोरी नहीं है। जिसके चलते इस रोग के पशुओं में बढ़ने की पूरी आशंका नजर आ रही है।

समय रहते ध्यान दे सरकार बिगड़ सकते हालात – जिस तरह यह रोग पशुधन में तेजी से बढ़ रहा उसे देखते हुए सरकार को समय पर जागना होगा अन्यथा हालात बिगड़ सकते है।सरकार को इस रोग से फैलने से रोकने के लिए हर गांव में पशुओं के टीकाकरण अभियान चलाकर रोग को काबू करना होगा।

आपनो गांव श्री डूंगरगढ़ सेवा समिति आई आगे हेल्प नंबर किए जारी – श्रीडूंगरगढ़ में गोवंश में बढ़ रहे लंपी चर्म रोग से पीड़ित गोवंश के लिए आपणो गांव श्री डूंगरगढ़ सेवा समिति ने गोवंश की मदद के लिए हेल्प नंबर जारी करते हुए आमजन से अपील की है कि कहीं पर भी इस रोग से पीड़ित कोई भी गोवंश दिखाई दे तो समिति के हेल्प लाइन नंबर पर सूचना दें ताकि पीड़ित गोवंश का समय पर इलाज हो सके एवं इस बीमारी को आगे बढ़ने से रोका जा सके । सेवा समिति द्वारा हेल्पलाइन नंबर 8455818181 पर पीड़ित गोवंश की सूचना देकर गोवंश की मदद करें । गौरतलब है कि श्री डूंगरगढ़ की यह आपणो गांव सेवा समिति श्री डूंगरगढ़ कोरोना काल में भी सराहनीय सेवाएं दे चुकी है तथा सड़क हादसों में हजारों घायलों की जान बचाने में श्री डूंगरगढ़ आपनो गांव सेवा समिति परमार्थ की भूमिका निभा चुकी है।

किसान की जागरूकता से बछड़े का समय पर इलाज कराने से रोग जहां था वहीं रुक गया। फोटो गौरीशंकर तावनिया
सातलेरा गांव में समय पर इलाज कराने से बची छोटे बछड़े की जान। फोटो गौरीशंकर तावनिया सातलेरा
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