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ज्ञान विहीन आचरण और आचरण विहिन ज्ञान अधूरा है- आचार्य श्री महाश्रमण। श्रीडूंगरगढ़ के पारख परिवार को आचार्य श्री ने किया संबल प्रदान

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समाचार गढ़, श्रीडूंगरगढ़। तेरापंथ धर्म संघ के आचार्य श्री महाश्रमण अहिंसा यात्रा के दौरान मंगलवार को लूणकरणसर से विहार कर इसी क्षेत्र के गांव ढाणी भोपालाराम पहुंचे। यहां की स्कूल में आयोजित धर्म सभा में आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि सही आचरण के लिए सही ज्ञान होना अपेक्षित है। ज्ञान विहीन आचरण और आचरण विहीन ज्ञान दोनों में कमियां है। कोई कार्य करें और उसका ज्ञान नहीं हो तो कार्य नहीं भी हो सकता है। इसलिए जिस चीज का ज्ञान होगा तो कार्य भी अच्छा होगा। इसलिए ज्ञान और आचरण में समानता होनी चाहिए।

इस दौरान श्री डूंगरगढ़ से ढाणी भोपालाराम पहुंचे दिवंगत मदनलाल पारख के परिवार ने आचार्य श्री का दर्शन कर उनकी वंदना की तथा संभल प्राप्त किया। दिवंगत पारख के अनुज सुरेंद्र कुमार पारख ने आचार्य श्री को बताया कि हमने विगत कम समय में परिवार के चार स्तंभों को खोया है। हमारा परिवार हमेशा धर्म ध्यान में लगा रहता है। उन्होंने अपने भ्राता के जीवन के बारे में बताया। दिवंगत पारख की पुत्रवधू श्रीडूंगरगढ़ नगर पालिका में नेता प्रतिपक्ष अंजू पारख ने भाव गीतिका प्रस्तुत की। पुत्र मनोज पारख, साहित्यकार श्याम महर्षि व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता तुलसीराम चौरड़िया ने भी भाव प्रस्तुत किए। जिस पर परिवार को संबल प्रदान करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि शरीर तो नश्वर है, जो जन्म लेता है उसकी मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के लिए कोई समय भी निश्चित नहीं होता है। मौत कभी भी आ सकती है और यह जगत तो सपनों की माया की तरह है, आया और चला गया। आचार्य श्री ने कहा कि श्री डूंगरगढ़ के पारख परिवार के सदस्य मदन जी पारख एक दबंग, निर्भीक और स्पष्टवादी व्यक्ति थे, जो काल धर्म को प्राप्त हो गए। आचार्य श्री ने कहा कि पारख परिवार के साथ सर्व समाज के लोग आए हैं। यह बड़ी बात है। आचार्य श्री ने कहा कि पारख परिवार में धर्म ध्यान की भावना बनी रहे और मदन जी में जो विशेषताएं, गुणात्मकताए थी उसे संजो कर रखें। इस दौरान पारख परिवार के वरिष्ठ सदस्य भंवरलाल पारख, जुगल किशोर पारख, पंचायत समिति की प्रधान सावित्री देवी गोदारा, सोहनलाल ओझा, महेंद्र मालू, मणि शंकर सेठिया, भंवरलाल भोजक,रिद्धकरण झाकल, जय प्रकाश पवार, सत्यनारायण स्वामी, करणी सिंह बाना, आसकरण कोठारी, मनोज डागा, पन्नालाल मालू, चौथमल कोठारी व कमल कुमार बोथरा मौजूद रहे। इसके अलावा जैन तेरापंथी सभा तेरापंथ, महिला मंडल, अणुव्रत समिति, तेरापंथ युवक परिषद के श्रावक-श्राविकाएं तथा सर्व समाज से जुड़े लोगों ने भी भागीदारी निभाई।

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