समाचार-गढ़ 7 अक्टूबर, 2026।
भारत में विदेशी युवतियों को कथित तौर पर अवैध तरीके से दाखिल कराने वाले नेटवर्क की जांच में घुसपैठ के नए रास्तों और संपर्कों की जानकारी सामने आई है। पूछताछ में आरोपित मोहम्मद हसन से मिली जानकारी के आधार पर जांच एजेंसियों को आशंका है कि बांग्लादेश सीमा पर निगरानी बढ़ने के बाद नेटवर्क ने म्यांमार से सटे मणिपुर और मिजोरम के पहाड़ी इलाकों के रास्ते भारत में प्रवेश कराने की कोशिश शुरू की।
ग्वालियर GRP ने चार म्यांमार मूल की युवतियों को पकड़ा
मामला तब सामने आया जब ग्वालियर जीआरपी ने म्यांमार मूल की चार युवतियों समेत छह लोगों को पकड़ा। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, युवतियों को बांग्लादेश के कॉक्स बाजार स्थित कुतुपालोंग शरणार्थी शिविर से भारत लाए जाने की आशंका है। मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, पहले एक संदिग्ध को ट्रेन में पूछताछ के लिए पकड़ा गया था। उसकी निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में कार्रवाई की गई, जहां मोहम्मद हसन को चार युवतियों के साथ पकड़ा गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि युवतियों को भारत में लाने और आगे भेजने में और कौन लोग शामिल थे।
पहले भी तीन विदेशी युवतियों को लाने का दावा
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित नेटवर्क पहले भी तीन विदेशी युवतियों को भारत ला चुका है। सीमा पार कराने के बाद उन्हें अलग-अलग शहरों में भेजे जाने की बात सामने आई है।
एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि इन युवतियों के रहने की व्यवस्था किन लोगों ने की और क्या उन्हें घरेलू काम, शादी या स्थानीय संपर्कों के जरिए अलग-अलग जगहों पर बसाने की कोशिश की गई थी। इन पहलुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
स्थानीय पहचान बनाने के लिए दस्तावेजों के इस्तेमाल का शक
जांच एजेंसियों को यह भी संदेह है कि कुछ युवतियों को स्थानीय निवासी के तौर पर स्थापित करने के लिए यूएचआईडी कार्ड और दूसरे दस्तावेजों का इस्तेमाल करने की कोशिश की गई हो सकती है। पुलिस इन दस्तावेजों की जांच कर रही है और उनके मूल पते व परिवार से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।
दो युवतियों के रोहिंग्या होने की जानकारी
जांच के दौरान दो युवतियों के रोहिंग्या होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, अधिकारियों के स्तर पर इसकी अंतिम पुष्टि दस्तावेजों की जांच के बाद ही होगी। इसलिए फिलहाल इसे जांच में सामने आई जानकारी के तौर पर देखा जा रहा है।
NIA की जांच का इंतजार
मामले की अंतरराष्ट्रीय सीमा पार आवाजाही और संभावित नेटवर्क को देखते हुए NIA को भी सूचना दी गई है और आगे की जांच की संभावना है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, NIA टीम के ग्वालियर पहुंचने की संभावना थी, लेकिन मंगलवार को टीम नहीं पहुंची।
पुलिस अब पकड़ी गई युवतियों के दस्तावेज, मूल पते और परिजनों की जानकारी जुटा रही है। जांच पूरी होने के बाद नियमों के अनुसार उन्हें उनके परिवार तक वापस पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।








