समाचार-गढ़ 7 अक्टूबर, 2026।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में ड्रोन हमलों का खतरा इतना बढ़ गया है कि सुरक्षा चौकियों को बचाने के लिए पुलिस ने एक बेहद कम लागत वाला तरीका अपनाया है। हंगू जिले में पुलिस चेकपोस्ट के ऊपर कई मीटर की ऊंचाई पर मछली पकड़ने वाले जाल लगाए गए हैं। इन जालों को ड्रोन को रोकने या उसके हमले के असर को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
ड्रोन हमले के बाद निकाला गया ये तरीका
हंगू की सरकी पियाला पुलिस चेकपोस्ट पर इसी साल 16 अप्रैल को ड्रोन और हथियारों से हमला हुआ था। पुलिस इंस्पेक्टर फैयाज खान के मुताबिक, हमले के दौरान विस्फोटक ले जा रहे ड्रोन के साथ जमीन से भी गोलीबारी हुई। करीब सात घंटे चले इस हमले में एक बख्तरबंद वाहन के ड्राइवर की मौत हुई और एक कांस्टेबल घायल हुआ। इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP ने ली थी।
इसके बाद हंगू पुलिस ने चेकपोस्ट की छतों और बाहरी दीवारों के बीच ऊपर की तरफ मजबूत जाल लगाने का फैसला किया। जाल को रस्सियों और तारों की मदद से इस तरह लगाया गया है कि वह चेकपोस्ट के ऊपर एक तरह की एरियल छत बना देता है।
कैसे काम करेगा मछली का जाल?
पुलिस अधिकारी फैयाज खान के मुताबिक, अगर कोई ड्रोन चेकपोस्ट के ऊपर आता है तो उसके जाल में फंसने की संभावना है। पुलिस का मानना है कि इससे ड्रोन को रोका जा सकता है या उसे निष्क्रिय करने का मौका मिल सकता है।
पुलिस के मुताबिक, अगर ड्रोन जाल में नहीं भी फंसे और उसके ऊपर विस्फोट हो जाए, तो विस्फोट के टुकड़ों का असर नीचे मौजूद पुलिसकर्मियों पर सीधे पड़ने के बजाय हवा में फैल सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी माना है कि यह व्यवस्था पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती।
एक चेकपोस्ट पर करीब 4 लाख पाकिस्तानी रुपये का खर्च
हंगू के जिला पुलिस अधिकारी तारिक हबीब के अनुसार, एक सामान्य चेकपोस्ट को इस तरह के जाल से ढकने में करीब 4 लाख पाकिस्तानी रुपये खर्च होते हैं। संवेदनशील पुलिस स्टेशनों और चेकपोस्ट पर इस व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा रहा है।
खैबर पख्तूनख्वा पुलिस के मुताबिक, हंगू के अलावा कोहाट, करक, बन्नू, लक्की मरवत और डेरा इस्माइल खान जैसे संवेदनशील इलाकों में भी इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था अपनाई गई है। कुछ सैन्य ठिकानों पर भी ओवरहेड नेटिंग का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ड्रोन हमलों का बढ़ता खतरा
खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमलों में ड्रोन और क्वाडकॉप्टर का इस्तेमाल बढ़ा है। सितंबर में डॉन ने भी रिपोर्ट किया था कि पिशावर और प्रांत के अन्य इलाकों में संवेदनशील पुलिस स्टेशनों और चेकपोस्ट पर सुरक्षात्मक जाल लगाए गए हैं। पुलिस का कहना था कि इस तरह की व्यवस्था का मकसद ड्रोन और क्वाडकॉप्टर को पुलिस ठिकानों तक पहुंचने से रोकना और जवानों व इमारतों को सुरक्षित रखना है।
यानी जिस खतरे से निपटने के लिए आमतौर पर महंगी एंटी-ड्रोन तकनीक की जरूरत होती है, उसके बीच हंगू पुलिस ने फिलहाल मछली पकड़ने वाले जाल को एक अतिरिक्त सुरक्षा परत के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू किया है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण के बाद ही किया जा सकता है।








