समाचार गढ़, 9 अक्टूबर 2026|
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव इस बार मतदानकर्मियों के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। जिले में तीन चरणों में होने वाले चुनाव के दौरान मतदान दलों को लगातार पांच दिन तक अलग-अलग जिम्मेदारियां निभानी होंगी। खासकर बड़ी ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव के लिए मतपत्र तैयार करना कर्मचारियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
जिले की 107 ग्राम पंचायतों में मतदाताओं की संख्या 4 हजार से अधिक है। इनमें सबसे बड़ी चुनौती उन पंचायतों में होगी, जहां मतदाताओं की संख्या 4 हजार से ज्यादा है और मतपत्रों पर प्रत्याशियों के नाम हाथ से लिखने होंगे। इसके लिए मतदानकर्मियों को देर रात तक काम करना पड़ सकता है और उनकी ड्यूटी 36 से 48 घंटे तक खिंचने की आशंका है।
एक मतपत्र भरने में लगेंगे 25 से 30 सेकंड
राज्य निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव के लिए मतपत्रों का प्रारूप पहले से छपा हुआ रहता है, लेकिन प्रत्याशियों के नाम और चुनाव चिह्न आवंटित होने के बाद मतपत्रों पर संबंधित विवरण हाथ से भरना होगा।
एक मतपत्र भरने में औसतन 25 से 30 सेकंड लग सकते हैं। वहीं, एक हजार मतदाताओं के नाम लिखने और उनका क्रॉस-चेक करने में करीब 3.5 से 4 घंटे का समय लग सकता है।
ऐसे में 4 हजार से अधिक मतदाताओं वाली ग्राम पंचायतों में मतपत्र तैयार करने और उनका मिलान करने में कई घंटे लग सकते हैं। यदि नाम लिखने या मिलान करने में गलती होती है, तो उसे ठीक करने के लिए दोबारा जांच करनी पड़ सकती है। इससे मतदानकर्मियों पर काम का दबाव बढ़ने की आशंका है।
गुड़ागौड़जी में सबसे ज्यादा 10,478 मतदाता
जिले की कुल 107 ग्राम पंचायतों में मतदाताओं की संख्या 4 हजार से अधिक है। अखबार में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, गुड़ागौड़जी ग्राम पंचायत में सबसे ज्यादा 10,478 मतदाता और 29 वार्ड हैं।
इसके अलावा जसवंतगढ़ में 8,656, इस्लामपुर में 8,343, पौंख में 8,304, गोठड़ा में 7,692, बड़ागांव में 7,750, श्यालू में 7,541, चिड़ावा में 7,398 और बलाई में 7,290 मतदाता बताए गए हैं।
इन बड़ी ग्राम पंचायतों में मतपत्र तैयार करने और प्रत्याशियों के नामों का सही मिलान करने में मतदानकर्मियों को अधिक समय देना पड़ सकता है।
पांच दिन तक चलेगी मतदानकर्मियों की ड्यूटी
चुनाव आयोग की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार, मतदान दलों को पांच दिनों तक अलग-अलग चरणों में जिम्मेदारियां निभानी होंगी।
पहला दिन: मतदान दल रवाना होकर आवंटित पंचायत तक पहुंचेंगे और मतदान केंद्र स्थापित करेंगे।
दूसरा दिन: जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए EVM से मतदान कराया जाएगा। मतदान के बाद मशीनें सुरक्षित जमा करानी होंगी और संबंधित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
तीसरा दिन: सरपंच और वार्ड पंच के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने, उनकी जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी। चुनाव चिह्न आवंटित होने के बाद मतदानकर्मी मतपत्रों पर प्रत्याशियों के नाम दर्ज करेंगे।
चौथा दिन: सरपंच और वार्ड पंच के लिए मतपत्रों के जरिए मतदान कराया जाएगा। मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे।
पांचवां दिन: उपसरपंच का चुनाव कराया जाएगा। इसके बाद मतदान दलों को अपना काम पूरा करके मुख्यालय लौटना होगा।
गलतियों की गुंजाइश कम, जिम्मेदारी ज्यादा
बड़ी ग्राम पंचायतों में मतदाताओं की संख्या अधिक होने के कारण मतपत्रों पर प्रत्याशियों के नाम लिखने और उनका मिलान करने में सावधानी बरतनी होगी। नाम या चुनाव चिह्न में गलती होने पर मतदान प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए कर्मचारियों को मतपत्र तैयार करने के साथ-साथ उनकी जांच भी करनी होगी।
अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ पंचायतों में मतदानकर्मियों को देर रात तक जागकर काम करना पड़ सकता है। लगातार कई दिनों तक चुनावी जिम्मेदारियां निभाने के कारण उनके सामने आराम और समय प्रबंधन की चुनौती भी रहेगी।
इस तरह झुंझुनूं जिले में पंचायत चुनाव सिर्फ मतदान कराने तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि मतपत्र तैयार करने, उनकी जांच, मतदान, मतगणना और उपसरपंच चुनाव तक कर्मचारियों को लगातार सक्रिय रहना होगा।








